अगला नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला फरवरी 2025 में होगा
लाल बिहारी लाल
नई दिलली। अगले साल नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 1 से 9 फरवरी 2025 को आयोजित होगा। नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे ने विश्व पुस्तक मेला 2024 के सफल आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करे हुए सभी आगंतुकों, प्रकाशकों, सह-आयोजक संस्थाओं और मीडियाकर्मियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा, ”हमें पूर्ण विश्वास है कि अगली बार और अधिक प्रकाशक और पाठक इस मेले में शामिल होंगे और भारतीय प्रकाशन एवं लेखन की वैश्विक पहचान को मेले से एक मजबूती मिलेगी।” नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया के निदेशक युवराज मलिक के अनुसार, ”नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2024 भारतीय प्रकाशन उद्योग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान देने में सफल रहा। इस मेले में जहाँ एक ओर विश्व के सभी शीर्ष पुस्तक मेलों- फ्रेंकफर्ट (जर्मनी), बोलोनिया (इटली), अबूधाबी, लंदन, तुर्की, शारजाह के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों ने भाग लिया, वहीं आम जनता की भी भरपूर भागीदारी रही।” उन्होंने यह भी बताया कि अगले विश्व पुस्तक मेले की तैयारियाँ अभी से शुरू कर दी गई हैं। 1 से 9 फरवरी 2025 के बीच आयोजित होने वाले नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले के लिए इच्छुक प्रकाशक अपनी प्रतिभागिता का अनुरोध ई-मेल द्वारा एनबीटी इंडिया को प्रेषित कर सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अगले वर्ष बी2बी जोन को और भी बड़ा किया जाएगा, विश्व के श्रेष्ठ पुस्तक मेला आयोजकों के एक सेमिनार का आयोजन किया जाएगा और अतिथि देश के साथ-साथ एक फोकस राज्य अथवा केंद्र-शासित प्रदेश के साहित्य का भी विशेष प्रदर्शन किया जाएगा। फेस्टिवल्स ऑफ़ फेस्टिवल और भी समावेशी होगा, साथ ही पाठक अपने पसंदीदा लेखकों से मिलने की अनुशंसा ई-मेल कर सकते हैं।
10 से 18 फरवरी के बीच प्रगति मैदान में आयोजित इस बार नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला कई मायनों में खास रहा। एक ओर जहाँ पुस्तक प्रेमियों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई, वहीं भारत के प्रकाशन उद्योग ने भी नई ऊँचाइयों को छूआ। विदित है कि लगभग 50 हजार वर्ग मीटर में लगे इस बार के विश्व पुस्तक मेले में एक हजार से अधिक प्रकाशकों की किताबें सजी थीं। इस बार किताबों की हुई रिकॉर्ड तोड़ बिक्री ने भी प्रकाशकों के उत्साह में इजाफा किया। लाखों बच्चों ने पाठ्यक्रम से हटकर कविताओं, कहानियों, उपन्यास और चित्रकथाओं की किताबों को पढ़ना पसंद किया। उनके लिए हॉल 3 में अलग से व्यवस्था थी। कॉलेज के छात्र, बच्चों के संग आए अभिभावक, प्रसिद्ध साहित्यकार, कलाकार, दर्शनार्थी, नेता—अभिनेता, भाषाविदों, साहित्य आलोचकों, समीक्षकों, चित्रकारों, अध्येताओं, राजनयिकों, प्रशासनिक अधिकारियों हर किसी के लिए यह साहित्यिक उत्सव आकर्षण का केंद्र रहा। प्रगति मैदान के नवीन हॉलों में आयोजित यह मेला स्वच्छता, समग्रता, समावेशिता, सर्वभाषा हर मायनों में सार्थक रहा।

