तुलसीदास और उनका महाकाव्य रामचरितमानस

 

 

राजीव कुमार झा

महाकवि तुलसीदास के महाकाव्य ‘रामचरितमानस ‘ की रचना भूमि और लेखन संदर्भ को देश के विराट सामाजिक – सांस्कृतिक प्रसंग के रूप में देखा जाना चाहिए । राम के पावन चरित की सुंदर कथा का स्तवन करते हुए इस काव्य ग्रंथ के सारे कथा सोपानों में हमारे देश की जीवन परंपरा के समग्र तत्वों से अवगत होने का सौभाग्य मिलता है और कवि धर्म – अध्यात्म , ज्ञान , वैराग्य , कर्म , बुद्धि – विवेक की कसौटी पर रामकथा के माध्यम से इस कलिकाल में एक तरह से सबको नवजीवन का संदेश सुनाता है !

रामायण संसार का एक श्रेष्ठ महाकाव्य है और इसकी कथा पर आधारित काव्यरचना की प्रक्रिया को किसी चुनौती से कम नहीं कहा जा सकता है ! तुलसीदास के रामचरितमानस की सार्थकता इस रचनाभूमि पर काफी साफ – साफ उजागर होती है और भाव , भाषा , शैली , पात्र – परिवेश के चित्रण में यहाँ काव्यकला सरलता और सरसता से विराट फलक पर जीवन की व्यंजना को प्रस्तुत करती है !

तुलसीदास ने रघुकुल की महान वंशकथा के रूप में रामचरितमानस की रचना और इसके पौराणिक ताने बाने में युगीन यथार्थ को समेटते हुए नाना प्रकार की भौतिक विषमताओं से परिपूर्ण संसार में आत्मिक प्रेम के उदात्त धरातल पर भारतीय संस्कृति में प्रवाहित नीति , आदर्श , चिंतन और भाव – विचार के जीवन संदर्भों को इस काव्यकृति में सरसता से चित्रित किया है और इसका आस्वादन मनुष्य की आत्मा को सारे विकारों से रहित कर देता है ! तुलसीदास की रामकथा की यह सबसे बड़ी महिमा है जिसका प्रतिपादन उन्होंने प्रभावी शैली में अपने इस काव्यग्रंथ में किया है !

तुलसीदास ने रामचरितमाननस में मनुष्य की आत्मा को आह्लादित और ऊर्जस्वित करने वाली रामकथा का सार प्रस्तुत किया है । रामायण में संस्कृत के पौराणिक साहित्य में निहित ज्ञान की अमृतधारा को वाल्मीकि ने लोकरंजक रूप प्रदान करके भारतीय समाज संस्कृति जनजीवन को सनातन धर्म के निर्वहन का सच्चा पाठ पढ़ाया था । तुलसीदास ने रामचरितमानस में हिदू सभ्यता और संस्कृति की इस महागाथा का जीवंत चित्रण किया है ।

भारतीय काव्य परंपरा में रस को कथा वर्णन के मूल में स्थित माना जाता है और इसे काव्य की आत्मा भी कहा जाता है ! तुलसीदास के रामचरितमानस में जीवन की सुंदर रसाभिव्यंजना हुई है और श्रृंगार , वीर , करुण , रौद्र रसों के अलावा शांत रस के साथ अन्य रसों का सुंदर संयोग यहाँ काव्य में कला के सात्विक सौंदर्य का समावेश करता है !