परमार्थ निकेतन में उत्तरप्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष श्री स्वतंत्र देव जी पधारे*

 

पर्यावरण एवं जल संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, यमुना स्वच्छता, ’’भिक्षा नहीं शिक्षा’’, तीर्थ क्षेत्रों में बच्चें भिक्षा न मांगे बल्कि उनके लिये शिक्षा की व्यवस्था आदि विषयों पर हुई चर्चा

’भिक्षा नहीं शिक्षा’ – स्वामी चिदानन्द सरस्वती*

*ऋषिकेश, फरवरी।परमार्थ निकेतन में उत्तरप्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष श्री स्वतंत्र देव जी पधारे, परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों और आचार्य ने उनका दिव्य स्वागत किया। श्री स्वतंत्र देव जी ने परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी से भेंट कर आशीर्वाद लिया।
स्वामी जी ने श्री स्वतंत्र देव जी से यमुना स्वच्छता के विषय में चर्चा करते हुये कहा कि यमुना स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि आगरा में ताज महल होने के कारण विश्व के अनेक देशों से पर्यटक वहां पर आते हैं साथ ही ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी मथुरा तथा वृंदावन हमारे पवित्र तीर्थ क्षेत्र है जहां पर लाखों की संख्या में देशी-विदेशी श्रद्धालु आते हैं, अतः यमुना सहित उस पूरे क्षेत्र के स्वच्छ, हरित विकास, एवं घाटों का सौन्द्रर्यीकरण करना जरूरी है। स्वामी जी ने कहा कि हमारे तीर्थ स्थलों पर भिक्षा, वह भी छोटे-छोटे बच्चों के द्वारा मांगी जाती है इसलिये भिक्षा को शिक्षा में बदलने की जरूरत है ताकि बच्चें सड़कों पर नहीं बल्कि विद्यालय में जायें जिससे उनकी मानसिकता में परिवर्तन हो सके। बढ़ती बेरोजगारी के लिये भिक्षावृति भी एक महत्वपूर्ण कारक है। स्वामी जी ने कहा कि उत्तरप्रदेश में लघु और कुटीर उद्योगों की अपार सम्भावनायें है; महिलाओं को इसके लिये प्रेरित कर उन्हें प्रशिक्षण दिया जाये ताकि वे आत्मनिर्भर हो सके।
माँ यमुना की स्थिति के विषय में चर्चा करते हुये स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि यमनोत्री से लेकर प्रयागराज तक यमुना जी उत्तराखण्ड, राजस्थान, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश से होकर गुजरती हैं परन्तु अपनी इस यात्रा में दिल्ली के 22 किलोमीटर में वह सबसे अधिक प्रदूषित होती है। उन 22 किलोमीटर में 18 गंदे नाले और उसमें से वजीराबाद बांध और ओखला बांध के बीच 15 नाले यमुना में गिरते हैं जिससे यमुना के जल में अमोनिया की मात्रा 1.12 पार्टिकल्स पर मिलियन पहुंच गयी है जो स्वास्थ्य के लिये अत्यंत हानिकारक है। अगर हम दिल्ली की ही बात करें तो लगभग 3269 मिलियन गैलन गंदा पानी, औद्योगिक कचरा, पेपर मिल, चीनी मिल, गन्ना पेरन का कचरा सीधे तौर पर यमुना में डाला जा रहा है जिससे दिल्ली से अगरा जाते-जाते यमुना लगभग मृतप्राय हो गयी है। स्वामी जी ने कहा कि यमुना को जीवंत बनाये रखने के लिये अथक प्रयास करने की जरूरत है। साथ ही हम नदियों के तटों पर आरती का क्रम आरम्भ करके काफी हद तक नदियों को प्रदूषण मुक्त कर सकते हैं।
आज की दिव्य गंगा आरती के पश्चात स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने सभी को जल संरक्षण का संकल्प कराया। माननीय स्वतंत्र देव जी को पर्यावरण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा और अंगवस्त्र प्रदान किया तथा सभी ने मिलकर विश्व स्तर पर स्वच्छ जल की आपूर्ति हेतु विश्व ग्लोब का जलाभिषेक किया।