दुखद खबर

दुखद खबर ! दिल्ली से है हैड कांस्टेबल रत्तन लाल जी की CAA और NRC के हिंसात्मक आन्दोलन के समर्थक और खिलाफत करने वाले आन्दोलनकारियों की गोली ने जान ले ली है । सरकार और हम समाज के सभ्य लोग इस पर खामोश है । यदि रतन लाल जी आन्दोलनकारियों के परिवार के सद्स्य होते तो क्या इस राजनैतिक आन्दोलन को हवा देने वाले लोग सही कहते । बड़ा सवाल यह है कि क्या रतन लाल जी को कोई वापस लोटा सकता है क्या ? उनके परिवार की पीढा कोई कम कर सकता है क्या ? तो फिर सरकार और पुलिस महकमे तथा आन्दोलन को दोनो तरफ से हवा देने वालो को रतन लाल जी की मौत की जिम्मेदारी लेनी चाहिए । इस आन्दोलन को हवा देने वाले नौजवानो के माँ- बाप को भी इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी । अपने बच्चों को इस हिंसात्मक आन्दोलन मे जाने से रोकना चाहिए । मीडिया भी इस आन्दोलन को हवा देना बन्द करे और सोशल मीडिया का लोग इसके लिए तुरंत बन्द करे । मोदी सरकार को भी जिद करनी बन्द करना चाहिए । पहले लोगों को समझाए तब कदम उठाना चाहिए ।
एक तरफ मोदी सरकार अथिति देवो भवो के कर्तव्य का पालन कर रही है तो दूसरी तरफ दिल्ली से दुखी करने वाली खबर पुलिस महकमे के लिए और हम दिल्ली के साथ-साथ देशभर के लिए है रतन लाल की मौत ।
इसके बाद भी सरकार और समाज के लोग नही जागे तो हो सकता है अगला रतन लाल हमारे परिवार का एक सद्स्य हो । आज इस घटना ने इस आन्दोलन और सरकार की खामोशी पर सवाल अवश्य खड़ा कर दिया है ।
यह हमारे निजी विचार है इससे यदि किसी की भावना आहत हुई हो तो एक बार अवश्य विचार करे