प्रधानमंत्री की “अपील” ना तो वांछनीय है और ना ही देश के लिए लाभदायक है।

आज हम कोरोना वायरस बिमारी की चुनौती का सामना कर रहे हैं जिसने विश्वभर में तबाही मचा रखी है यानी इस बिमारी से अब तक 10 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं और 54 हजार से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। यही कारण है कि दुनिया के अधिकांश देशों में इस महमारी से बचने के लिए लॉकडाउन की घोषणा कर दी गई है जिसके नतीजे में हर प्रकार की गतिविधियां बिल्कुल रुक गई हैं। हम भी लॉकडाउन की स्थिति का सामना कर रहे हैं और यह बहुत अच्छी बात है कि हम लॉकडाउन के सारे नियमों का पालन कर रहे हैं और स्वयं को अपने घरों में कैदी बना लिया है। क्योंकि हर भारतीय बड़ी ईमानदारी से कोरोना जैसी जानलेवा महामारी को हराने की इच्छा रखता है। यह देश के लोगों की एकता का सबसे बड़ा प्रदर्शन है। इस महामारी से लड़ने का हमारा यह व्यवहार ये भी प्रदर्शित करता है कि हमारे भीतर हर प्रकार की कठिनाइयों को सहने की मज़बूत इच्छाशक्ति है। इस परिप्रेक्ष्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दो दिन पहले देशवासियों से की गई अपील कि 5 अप्रैल को रात 9 बजे अपने घरों की लाइट बुझाकर अपने दरवाजों और बालकनी पर आ जाएं और दीपक, मोमबत्ती, टोर्च या मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट को जलाएं, निरर्थक है क्योंकि यह जरूरी नहीं है कि लोग प्रधानमंत्री की एकता प्रदर्शन करने से संबंधित अपील पर अमल करें। इसका कारण यह है कि देशवासी स्वयं को घरों में कैदकर पहले से ही अपनी एकता का प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह अपील निश्चित तौर पर इस बिमारी से लड़ने में कोई मददगार साबित नहीं होगी। यह कोई बुद्धिमतापूर्ण अपील नहीं है। यह अलग बात है कि प्रधानमंत्री होने के नाते कुछ भी अपील कर सकते हैं। जब देश के सभी लोग खुद को घरों में कैद करके अपनी एकता का प्रदर्शन कर रहे हैं तो 5 अप्रैल की रात के 9 बजे 9 मिनट के लिए अपने घरों की बत्तियों को बुझाकर और दीपक, मोमबत्ती, टोर्च या मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट जलाने की क्या जरूरत है? यह तमाशे के अलावा कुछ नहीं। इस बीच देशभर में एक विशेष समय पर घरों की सभी लाइट को बुझाए जाने से संबंधित प्रधानमंत्री की अपील पर कुछ लोगों द्वारा विरोध जताया जा रहा है और संबंधित विभाग द्वारा इस अपील पर पुनर्विचार किए जाने की सलाह दी जा रही है क्योंकि उन्हें डर है कि ऐसा करने से देशभर में बिजली के ट्रांसफॉर्मर 24 घंटों तक बंद हो जाएंगे। इस प्रकार यह समझा जा रहा है कि कोरोना महामारी से लड़ने के लिए देशवासियों द्वारा एकता प्रदर्शन करने का यह तरीका ना तो वांछनीय है और ना ही लाभदायक है।

– रोहित शर्मा विश्वकर्मा