मजदूरों किरादारों के भुगतान कौन करेगा जवाब दे सरकार

नई दिल्ली-2020, उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री अंरविद केजरीवाल ने कोरोंना वायरस महामारी के चलते आम और गरीबों के रोजगार पर प्रतिबंध लगाने से पहले प्राईवेट कंपनी में कार्य करने वाले मजदूरों के लिए कोई नियम हेल्पलाइन जारी क्यों नही किए थे जारी किए भी गए तो उनके पालन कहाँ तक किए गए स्वतंञता सेनानी परिवार के सदस्य नागरिक अधिकार चेतना परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीश सक्सेना ने कहा सरकार के बनाए नियमों के अनुसार प्राइवेट कंपनी मालिकों के द्वारा मजदूरों को पूरी सैलरी प्राप्त नही कराई जाती है जबकि उनसे हस्ताक्षर नियमों के मुताबिक ही कराए जाते हैं यदि गरीबों का पेट काटने वाले प्राइवेट कंपनियों के मालिकों के खिलाफ कोई शिकायत करें तो उसे नौकरी से निकाल दिया जाता है या फिर पुलिस से धमकियां दिलवाई जाती हैं मजदूरों के पक्ष में बोलने वाले सक्सेना को पुलिस का बड़ा अधिकारी बताने वाले से उन्हें धमकियां भी दिलवाई गई थी जिसकी आवाज़ और मोबाइल नंबर को सक्सेना ने सबूतों के तौर पर सुरक्षित रखा हुआ है सक्सेना ने प्रमाणित सबूत सरकारी दस्तावेजों के हवाले से बताया भाजपा के पूर्व विधायक भू-माफिया प्रद्मूमंन राजपूत और उसके सहयोगी कंपनी मालिकों के खिलाफ मिडिया की निगरानी में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी से जाँच और कानूनी कार्यवाही करवाई जाए तो अरबों रुपए के घोटालों के खुलासे किए जा सकते हैं जिनकी मोदी सरकार पक्षपाती बनी हुई है उन्होंने दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री अंरविद केजरीवाल और मोदी सरकार से जानना चाहा है कि जिन मजदूरों की सैलरी को प्राइवेट कंपनियों के मालिक देने से इंनकार करते हैं तो उनके मकानों के किराए के भुगतान कौन करेगा जवाब दे केंद्र और दिल्ली सरकार?