ये रिश्ता क्या कहलाता है ?

पालघर में हिन्दू साधुओं की हत्या में जिन ईसाई लोगो को स्थानीय पुलिस ने गिरफ्तार किया है, उनकी जमानत के प्रयास होने लगे है और यह प्रयास सोनिया गांधी की खास ईसाई शिराज बलसारा कर रही है जो एक ईसाई एनजीओ काश्तकारी संघटन की प्रमुख है। जिसके पति का नाम प्रदीप प्रभु है और यह एनजीओ उसी ने ही बनाई थी। नाम से हिन्दू लगता है लेकिन यह इस पूरे घटनाक्रम का महत्वपूर्ण कड़ी है क्योंकि यह कोई साधारण व्यक्ति नही है। यह प्रदीप प्रभु, पहले टाटा इंस्टीटूट ऑफ सोशल साइंस में पढ़ाता था और उसका असली नाम पीटर डेमिलो है, जोकि कट्टर केथोलिक ईसाई है। इसने यह प्रदीप प्रभु नाम हिंदुओं की आंखों में धूल झोंकने के लिए ही रक्खा है। यह व्यक्ति कितना शक्तिशाली है यह इसी से पता चलता है कि यह काँग्रेस शासित यूपीए सरकार में सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली नेशनल एडवाइजरी कमेटी का सदस्य था। जिसने हिन्दूओं का नरसंहार करने वाले काले कानून “Communal Voilance Bill” की पटकथा सोनिया गांधी के कहने पर लिखी थी। काँग्रेस शासित यूपीए काल के कई कानूनों के ड्राफ्ट इसी के बनाये हुये है, आईएएस/आईएफएस के कोर्स में इसके लेक्चर्स अनिवार्य थे और साथ मे यूपीए सरकार के 10 वर्षीय कार्यकाल में यह भारत सरकार की कई समितियों का सदस्य भी था। कुलमिलाकर सोनिया ने अपने आश्वस्त लोगों को भारत की सभी संवैधानिक संस्थाओं पर प्रतिष्ठित कर दिया था और उसमें से 50% अभी भी हैं, जो अपने संवैधानिक पद का दुरुपयोग करके हर संवैधानिक कार्य में सोनिया गांधी के कहने पर बाधा डालते हैं। संक्षेप में आप यह समझ सकते है कि सोनिया गांधी के शासनकाल में यह प्रदीप प्रभु उर्फ ईसाई पीटर डेमिलो, एनजीओ चलाने वालो में सबसे सशक्त व्यक्ति था। आज जब पूरे भारत का हिन्दू पालघर में साधुओं के हत्यारों की असलियत जानने में लगा हुआ है तब उनके हत्यारों को बचाने प्रदीप प्रभु उर्फ पीटर डेमिलो व उसकी पत्नी शिराज बलसारा सामने आ गयी है। यह जो दिख रहा है वह सिर्फ एक चेहरा नही है बल्कि एक पूरा तंत्र है, जो धर्मांतरण कराने वाले ईसाई गिरोह और क्रिप्टो ईसाइयों से जुड़ता हुआ सीधे दिल्ली में सोनिया गांधी तक पहुंचता है। पालघर हत्याकांड में संतों की हत्या के खून में रंगे हाथ सीधे सोनिया गांधी तक पोहोचते हैं। क्योंकिं पालघर का वो इलाका जहाँ संतों की हत्या हुई है वो 75% कन्वर्टेड ईसाइयों व काँग्रेस के सहयोगी वामपंथीयों से भरा हुआ है। कुल मिलाकर मामले को रफा दफा करने के लिए सोनिया गांधी उद्धव ठाकरे पर पूरा दबाब बना रही है और उद्धव ठाकरे सोनिया के सामने घुटने टेक कर पड़ा हुआ है।