लाखों मजदूर फसें है उत्तराखंड में

(उत्तराखंड) ऋषिकेश, (तेजभान शर्मा)/
लॉक-डाउन की वजह से जहाँ लाखों मजदूर विभिन्न राज्यों में फंसे है वही उत्तराखंड में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है, जहाँ से हजारों मजदूर साईकिलों से व पैदल अपने प्रदेशों की ओर निकलने को मजबूर हो गए है, वही ऋषिकेश के वीरभद्र बैराज में भी एक कम्पनी के माध्यम से उत्तर प्रदेश से कार्य करने आये लगभग 40-45 मजदूर भी लॉक-डाउन की वजह से फंस गये, इतना ही नही बैराज प्रशासन व सम्बंधित कम्पनी द्वारा जिस जगह पर मजदूरों को ठहराया गया वहाँ मजदूरों के मध्य सोसल डिस्टेंसिग व मास्क लगाने का ध्यान नहीं रखा गया, जहाँ मजदूरों को एक-एक टैंटों में आधा-आधा दर्जन से अधिक मजदूरों को ठहराया गया है वही मजदूर बिना सोसल डिस्टेंसिग अपनाये व मास्क लगाये घूमते देखे गए है, ऐसे में यदि कोई वायरस जनित घटना होगी तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।
तीर्थनगरी ऋषिकेश के वीरभद्र बैराज में बीते कुछ माह से स्टार काँम नाम की कम्पनी द्वारा सिविल कार्य किया जा रहा है जिसके लिए उत्तर प्रदेश के मजदूरों को कार्य पर लगाया गया है, लेकिन कोरोना वायरस की वजह से कार्य बन्द हो जाने के कारण बीते लॉक-डाउन के समय से ही वीरभद्र बैराज के एक खाली भूखण्ड पर मजदूरों को वीरभद्र बैराज प्रबंधन व सम्बंधित कम्पनी द्वारा ठहराया गया, जहाँ मजदूरों के ठहरने के लिए कोई पुख़्ता व्यवस्था नही रही, जिसकी वजह से उक्त मजदूर बैराज प्रबंधन व कंपनी की उपेक्षा के चलते एक साथ छह से नो लोगों तक एक-एक टैंटों में रहने को मजबूर हो रखे गये, इतना ही नहीं उक्त मजदूरों को जिम्मेदार बैराज प्रबंधन व कंपनी के मालिक तथा ठेकेदार द्वारा सोशल डिस्टेंसिग व मास्क सहित वायरस के बचाव के उपाय तक नही समझाए गए, वही जिस जगह पर लगभग ढाई माह से उक्त 40-45 मजदूरों को ठहरता गया वहाँ मजदूरों के लिए शौचालय न होने के कारण उन्हें खुले में जंगल-झाड़ियों में शौच के लिए जाने को विवश होना पड़ गया। जिससे परेशान होकर मजदूरों द्वारा अपने प्रदेश जाने के लिए बैराज प्रबंधन व कम्पनी मालिक सहित ठेकेदार से लगातार गुहार लगायी जाने लगी है।
ठेकेदार के माध्यम से कार्य कर रहे एक मजदूर सन्तोष ने बताया कि वह उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से ऋषिकेश वीरभद्र बैराज में मरम्मत कार्य के लिए आये थे, लेकिन लॉक-डाउन की वजह से उन्हें ठेकेदार द्वारा उक्त अव्यवस्थित भूखण्ड पर टैंटों में ठहरा दिया गया, वही उन्हें कम्पनी द्वारा खाना तो दिया गया लेकिन उनके परिवार के लिए कम्पनी ने कुछ भी सहयोग नही किया।
वही एक अन्य मजदूर शिवसागर ने बताया कि वह कई बार कम्पनी व सम्बंधित ठेकेदार को अपनी समस्या बता चुके हैं कि उन्हें शीध्र उनके प्रदेश भेजा जाए लेकिन उन्हें महज घर भेजने का आश्वाशन ही दिया गया है, साथ ही मजदूर राजेश ने बताया कि वह एक ही टेंट में आठ-नो लोग रहते है कोई सोशल डिस्टेंसिग का पालन नही हो पाता है ऐसे में यदि कोई बीमार हो जाए तो दिक्कत हो सकती है।
स्थानीय प्रशासन द्वारा जहाँ कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए सोशल डिस्टेंसिग बनाने के लिए हर सम्भव प्रयास किये जा रहे हैं वही ऐसे में मजदूरों के एक ही जगह पर एक साथ ठहरने के लिए किस के द्वारा अनुमति दी गई इसकी जांच की जानी आवश्यक हो गई है, वही इस संबंध में जानकारी देने के लिए कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति, कम्पनी, ठेकेदार व बैराज प्रबंधन सामने नही आया, ऐसे में यदि 40-45 मजदूरों में से कोई मजदूर बीमार हो जाये तो इसकी जिम्मेदारी कौन उठाएगा इस पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। वही सरकार, जिला व स्थानीय प्रशासन को एक साथ 40-45 मजदूरों को एक साथ बिना व्यवस्थाओं के ठहराने वालों पर कार्यवाही जरूर करनी चाहिए जिनकी लापरवाही की वजह से कभी भी अप्रिय घटना की स्थिति पैदा हो सकती है।