शोभन बाबा यूं ही नहीं थे सरकार, 24 गांवों के खेतों व किसानों की बिना सरकारी मदद के बुझाते थे प्‍यास !!

कल बाबा शोभन सरकार नहीं रहे। इस पर किसी को यकीन नहीं हो रहा। कानपुर व उसके आसपास भक्‍तों की खासी संख्‍या उनके आश्रम में जुटी थी। आसपास के 24 गांवों के खेतों व किसानों की प्‍यास बुझाने वाले सरकार को गांव वाले देवता मान कर पूजते रहे हैं। सरकार के अनूठे जल प्रबंधन पर पूरी दुनिया चकित है। बिना किसी सरकारी मदद के बाबा ने इन गांवों को कभी न सूखा रहने दिया न भूखा।
करोड़ों रूपये खर्च करने के बाद भी किसानों के खेतों को जहाँ पानी उपलब्ध करने में सक्षम नहीं हो पाती है सरकार। वहीँ एक अनपढ़ बाबा ने लगभग 24 गाँव के किसानों के खेतों को पानी से लबालब कर दिया ! बाबा का यह अनूठा जल प्रबंधन लोगों के लिए एक मिरेकिल से कम नहीं है। कुछ वर्ष पूर्व सोने के भंडार होने की घोषणा ने उ.प्र. के गाँव डोंडियाखेड़ा को सुर्खियों में ला दिया था। ये सुर्खियाँ लोगों के लिए और भी महत्वपूर्ण हो गयीं थी क्योंकि ये घोषणा एक ऐसे बाबा ने की थी जिन्हें उस गाँव के आस पास के लोग ईश्वर की तरह मानते हैं ! लोग मानते हैं लेकिन केंद्र की सरकार भी सोने की चमक में अंधी हो गयी जिसने बिना सोचे समझे बाबा की बात को तथ्य मानते हुए अपने अमले को सोने की ख़ोज में उतार दिया। जब कि केंद्र के पास सभी संसाधन उपलब्ध थे सत्यता को परखनें के लेकिन सोने की चमक ने डूबती सरकार को अंधा बना दिया। इस पूरे प्रकरण में सरकार की फज़ीहत तो हुई ही बाबा का विश्वास भी डगमगा गया।
• आम आदमी से बन गये सरकार –
कानपूर से लगभग 20 किमी. दूर शिवली के करीब शोभन गाँव के पास एक मंदिर शोभन सरकार के नाम से प्रसिद्ध है। इस मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा बाबा के द्वारा की गयी। मंदिर जैसे-जैसे प्रसिद्ध होता गया बाबा की प्रसिद्धी भी दिनों दिन बढ़ने लगी और लोग उन्हें शोभन सरकार कहने लगे। बाबा के दर्शन को अधिकारिओं, जनप्रतिनिधियों तथा धन्नासेठों की आवक बढ़ गयी। बाबा की कृपा उन पर बरषे स्वार्थवश लोगों ने दान देना शुरू कर दिया। बाबा ने इस धन को आसपास के ग्रामीणों के सुख-दुःख में लगाने का मन बना लिया और शुरू हुई एक अनूठी जल प्रबंधन की प्रक्रिया जिसने उस क्षेत्र के लगभग 20 गांवों में मिरेकिल कर दिया। मंदिर के चारों ओर लगभग एक सैकड़ा बोरिंग कर झील का निर्माण कराया। झील के सामानांतर खेतों को पानी देने को एक नहर का निर्माण कराया इस को संचालित करने के लिए पांडु नदी का बेहतरीन उपयोग किया गया। बाबा ने पांडु नदी के पानी को लिफ्ट कर सामानांतर चलने वाली नहर को पानी से भर दिया। पांडु नदी जैसे ही वर्षा के पानी से लबालब हो जाती है पानी को लिफ्ट कर नहर में डाल दिया जाता है। जिससे पानी का उपयोग किया जा सके। साथ ही बाढ़ से भी ग्रामीणों को बचाया जा सके। मालूम हो कि पांडु नदी के पाट की चौड़ाई अधिक न होने के कारण नदी थोड़े से ही पानी से उफना जाती है।
• सिंचाई का अदभुत प्रबंध –
नहर का पानी ग्रामीणों को मुफ्त में दिया जाता है। किसानों के खेतों तक पानी ले जाने की भी व्यवस्था की गयी है। नहर में 100-100 मीटर की दूरी पर कुलाबे बनाये गए हैं। जिससे किसान आसानी से समय पर सिंचाई कर सके। नहर से झील में तथा झील से नहर में पानी ले जाने के लिए भी शटर डाल कर व्यवस्था की गयी है। इन गांवों में धान की खेती किसान कर रहा है। जो तराई क्षेत्रों के अलावा संभव नहीं है। जहाँ एक ओर प्रदेश में तालाबों पर अतिक्रमण हो रहा है वहीँ इन गांवों में नए तालाबों का निर्माण कराया जा रहा है इन तालाबों को पानी से कैसे भरा जाय इसकी भी चिंता की जा रही है जो प्रशंशनीय है। तालाबों का निर्माण तो कर दिया जाता है। लेकिन उनकों कैसे पानी से पोषित किया जाय इसकी चिंता नहीं की जाती है। जिससे तालाब मर जाते हैं। बाबा के जल प्रबंधन से गाँव शोभन, सवाई बैरी, संबलपुर, जादेपुर, पुरवा, निगोहा तथा इन गांवों से सटे हुए 18 पुरवों के खेतों की सिंचाई होती है। इन 6 गांवों तथा 18 पुरवों में एक लाख से भी अधिक ग्रामीण रहते हैं। अब जब बाबा नहीं रहे हैं यहां के लोगों को उनकी कमी बहुत खलेगी। आज के अन्य बाबाओं से एकदम अलग आम आदमी के पालन हार शोभन सरकार को-

!! शत शत नमन !!