राजगीर:पहाड़ियों की गोद में बसा नगर

बिहार में भी देश के अन्य हिस्सों की तरह ग्रीष्म ऋतु में काफी गर्मी फैली होती है इसलिए जाड़े के मौसम में यहाँ काफी पर्यटक आते हैं लेकिन इसके बावजूद ग्रीष्म ऋतु में भी यहाँ पर्यटकों की आवाजाही दिखाई देती है। राजगीर बिहार का प्राचीन नगर है। इसे मगध साम्राज्य की राजधानी होने का गौरव प्राप्त है और राजगीर से जुड़ी कथा कहानियाँ महाभारत के अलावा जैन और बौद्धग्रंथों में भी पढने को मिलती हैं। यहाँ आज भी इस नगर के बाहर मगध के शासक अजातशत्रु के द्वारा निर्मित सुरक्षा दीवार के अवशेष विद्यमान हैं और इस नगर के अन्य पुरावशेष भी दर्शनीय हैं। राजगीर पटना से अस्सी- पच्चासी किलोमीटर दूर स्थित है और यहाँ से गया और भी कम दूरी पर बसा है। यह हिंदुओं का भी प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। यहाँ के तपोवन में स्थित गर्म पानी के कुंड और मंदिरों को हिंदू मतावलंबी पवित्र मानते हैं और यहाँ का मलमास का मेला प्रसिद्ध है। बौद्धग्रंथों में उल्लेख है कि महात्मा बुद्ध राजगीर में ही वर्षावास किया करते थे और इस दौरान गृद्धकूट पर्वत पर ठहरते थे। यहाँ इस स्थल को चिह्नित भी किया गया है। राजगीर में बिंबिसार का जेल, जरासंध का अखाड़ा और स्वर्णभंडार इस नगर के पुराने दर्शनीय स्थल हैं। हाल के वर्षों में पांडू पोखर और यहाँ के अन्य स्थलों के विकास पर भी सरकार के द्वारा ध्यान दिया गया है। इसके अंतर्गत जीवक के आम्रवन के आसपास के क्षेत्रों के सौन्दर्यीकरण के अलावा विश्व शांति स्तूप की समुचित देखरेख का कार्य शामिल है। राजगीर में भारत सरकार के संस्कृति विभाग के द्वारा नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना भी की गई है और नगर के बाहर घोड़ाकटोरा झील के मध्य में बुद्ध की ऊँची प्रतिमा स्थापित की गई है। यहाँ रेलमार्ग के अलावा सड़क मार्ग से भी आसानी से पहुँचा जा सकता है। बिहारशरीफ और नवादा इस नगर के पड़ोसी शहर हैं। यहां पर्यटकों के लिए अनेक धर्मशालाएँ और होटल स्थित हैं। राजगीर पहाड़ियों से घिरा और हरे—भरे जंगल के बीच बसा मनोरम स्थल है।
राजीव कुमार झा