मोदी सरकार को बदनाम करने को,

नई दिल्ली  । संबित पात्रा ने अभी डॉक्यूमेंट के साथ कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों की एक बेहद गंदी साजिश का पर्दाफाश किया आप किसी भी सेकुलर सूअर वामपंथी या कांग्रेसी के ट्विटर या वॉल पर देखिए तब वह मजदूरों की बेहद दर्दनाक तस्वीरें लगा रहे हैं लेकिन यह दोगले एक गंदी सच्चाई लोगों को नहीं बताए कि सिर्फ छत्तीसगढ़ राजस्थान झारखंड बंगाल के ही मजदूर इतने परेशान क्यो हैं ?और पैदल चलने को मजबूर हैं ? दरअसल अभी पूरे देश में लॉक डाउन है सभी राज्यों ने अपने यहां पर अपने अपने कानून के हिसाब से अलग-अलग धाराएं लगाई हैं तब ऐसे में यदि रेलवे को ट्रेन चलाना है तब उसे दोनों राज्यों की लिखित मंजूरी अनिवार्य है यानी कि जिस राज्य से ट्रेन चलेगी और जिस राज्य में ट्रेन पहुंचेगी ममता बनर्जी ने सिर्फ 9 ट्रेनों की मंजूरी दी उसमें से एक ट्रेन अजमेर में फंसे मुस्लिम श्रद्धालुओं के लिए थे… जबकि उत्तर प्रदेश में 500 ट्रेनों की मंजूरी दी झारखंड ने 38 ट्रेनों की मंजूरी दी बिहार ने 260 ट्रेनों की मंजूरी दी मध्य प्रदेश ने 240 ट्रेनों की मंजूरी दी लेकिन छत्तीसगढ़ में सिर्फ दो ट्रेनों की मंजूरी दी राजस्थान में तीन ट्रेन की मंजूरी दी और यही कारण है कि सड़कों पर जितने भी मजदूर पैदल चल रहे हैं वह या तो झारखंड के होंगे या राजस्थान के होंगे या छत्तीसगढ़ के होंगे या बंगाल के होंगे अभी कल बांद्रा और मुंबई सेंट्रल में बंगाल के मजदूरों ने खूब हंगामा किया सूरत में भी बंगाली मजदूरों ने खूब हंगामा किया अभी एक टीवी चैनल पर देखा कि हरिद्वार और ऋषिकेश में 3000 से ज्यादा बंगाली श्रद्धालु फंसे हुए हैं लेकिन ममता बनर्जी ने उनकी एक नहीं सुनी वही अजमेर में बंगाल के मुस्लिम श्रद्धालु फंसे थे तब उसने तुरंत ही ट्रेन की मंजूरी देकर उन्हें अपने राज्य वापस बुला लिया यहां गुजरात में बहुत से बंगाली मजदूर काम करते हैं वह सब परेशान हैं लेकिन मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए इन राज्यों ने जानबूझकर ट्रेनों की मंजूरी नहीं दी और तो और रवीश कुमार भी अपने वॉल पर मजदूरों की दर्दनाक कहानी लिख रहे हैं लेकिन बड़ी चालाकी से वह छुपा देते हैं इन मजदूरों की दुर्दशा के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है ?आखिर क्यों नहीं विपक्ष द्वारा शासित राज्य ट्रेनों की मंजूरी दे रहे हैं ? जबकि खुद रेल मंत्री ने कहा यदि राज्य मंजूरी दे तो मैं 300 ट्रेन रोजाना चला सकता हूं फिर विपक्ष राज्य मंजूरी क्यों नहीं दे रहे ? दरअसल कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां मजदूरों की लाशों पर गंदी राजनीति करना चाहती हैं यह पार्टियां चाहती है कि मजदूर मरे और हम उनकी लाशों को गिद्ध की तरह नोंचे।