आस्तीन के सांप मित्र राष्ट्र नेपाल के कारण पलिया में बढ़ा कोरोना का भीषण खतरा, शहर के लिए संकट घड़ी प्रशासन खतरा रोकने के लिए रात दिन कर रहा प्रयास फिर भी स्थित बेकाबू।

 

गगन मिश्रा । विश्वकान्त त्रिपाठी

पलिया शहर में पिछले दो से तीन दिनों में 1000/के लगभग नेपाली कामगार निजी वाहनो से चोरीछिपे सीमावर्ती इलाके मे पहुंच कर नेपाल मे घुसने के प्रयास मे थे लेकिन नेपाल की सीमा सील होने के कारण प्रवासी नेपपाली कामगार अपने देश मे नही प्रवेश पा सके जिन्हे पलियाकलां लखीमपुर खीरी मे अलग-अलग बने आधा दर्जन अस्थायी कोरंटाइन सेन्टरो पर ठहराया गया है जिनमें से अधिकांश महाराष्ट्र, गुजरात,अलीगढ से आये हुए श्रमिक हैं और वर्तमान में इन्हीं दोनों राज्यों में कोरोना तेजी से फैला हुआ है।
जिले का पूरा प्रशासन इन नेपाली श्रमिकों को नेपाल भेजना चाहता है परन्तु नेपाली प्रशासन अपने ही देश के नागरिकों को नेपाल में प्रवेश नहीं होने दे रहा है।
पलिया तहसील प्रशासन एवं जनमानस इन श्रमिकों की देखभाल एवं भोजन की व्यवस्था करने में रातदिन एक किये हुए हैं।पलिया जैसे एक छोटे से कस्बे में कोरोना जैसी महामारी के समय मे हजारों लोगों की रहने खाने की एकाएक व्यवस्था करना भी टेढ़ीखीर है फिर भी शहर वासियों व गुरुद्वारा साहब के सहयोग से प्रशासन सब कुछ कर रहा है।
इन हजारो श्रमिकों ने पलिया शहर को करोन बंम बना कर रख दिया है, यहां रखे गये नेपाली प्रवासी श्रमिकों की शुद्धता पूर्वक जांच करा दी जाये तो परिणाम बडे घातक होगें।
और कितने कोरोना पॉजिटिव होंगें यह तो कहना कानून जुर्म है फिर भी पलियाकला के लिये बहुत बड़ी संकट की घडी है
अतः सभी पलिया वालों से आग्रह है कि जब तक यह नेपाली श्रमिक पलिया में आते रहेगें/अथवा रहेगे तब तक शहर के लोग बिना काम के कोई भी घर से बाहर ना निकलें ऐसी हिदायत समाज सेवी व तहसील प्रशासन दोनो ने शहर और क्षेत्र वासियों से की है, और कहा गया है ना तो खुद बेवजह बाहर निकले और न किसी को निकलने दें।