अखंड सौभाग्य के लिए महिलाओ ने किया वटपूजन—–”

मछरेहटा – सीतापुर । सामाजिक सांस्कृतिक परम्पराओं से समृद्ध भारतवर्ष के लोग अपनी प्राचीन विरासत को सदियो से संजोए हुए है और इसी से हम अनेकता मे एकता के सूत्र को मजबूत बनाते हैं । हिन्दू धर्म मे तो प्रतिमाह कोई न कोई उत्सव होता ही है जिसकी अपनी अलग विशेषता होती है । महिलाओ के सौभाग्य सूचक विशेष रूप से करवा चौथ शिव त्रयोदशी वटसावित्री पूजन का महत्व है ।
पौराणिक मान्यता और जनश्रुतियों के आधार पर ऐसा मानना है कि मद्र देश के राजकुमार सत्यवान के साथ सावित्री का विवाह सम्पन्न हुआ । एक समय सत्यवान आखेट के लिए जंगल को गया उसके साथ सावित्री भी थी । विश्राम करने के लिए सत्यवान वटवृक्ष के नीचे सावित्री की गोद मे सिर रखकर लेट गया । थोड़ी देर बाद सावित्री की गोद मे ही उसके प्राण पखेरू उड़ गए । सावित्री ने सचेष्ट होकर देखा कि एक भीमकाय व्यक्ति हाथ मे पाश लिए भैंसे पर सवार होकर आया और चल दिया । सावित्री समझ गयी कि यह और कोई नही मृत्यु के देवता यमराज ही है । उसने सामने पहुंचकर उन्हे प्रणाम किया । यमराज के मुख से अचानक सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद निकल गया । इस पर सावित्री ने यमराज से कहा कि जब आप हमारे पति के प्राण ही लिये जा रहे है तो आपका दिया हुआ आशीर्वाद झूठा साबित हो जायेगा । सावित्री के तर्कसंगत वचन से यमराज निरुत्तर हो गए और उन्होंने सत्यवान के प्राण वापस कर दिए । इस प्रकार अपने सतीत्व और पतिव्रत धर्म का पालन करते हुए उसने अपने पति को यमराज से वापस ले लिया । उसी परम्परा का पालन करते हुए आज भी महिलाएं वटसावित्री का पूजन करती है और पति की दीर्घायु की कामना करते हुए अखंड सौभाग्यवती होने का वरदान मांगती है । मछरेहटा क्षेत्र मे अनेक जगहों पर वटसावित्री पूजन विधि विधान से किया गया ।