आजकल देश में कोरोना योद्धाओं की धूम मची

आजकल देश में कोरोना योद्धाओं की धूम मची हुई है ,जहां देखो वहां कोरोना योद्धाओं के नाम पर सम्मान करने का नाटक चल रहा है ,अभी वायरस तेजी से फैल रहा है और यह महानगरों की ओर से गांवों , कस्बों की ओर कूच कर गया है। छोटी-छोटी जगहों पर कोरोना वायरस के केस मिल रहे हैं। भारत में ही इसकी संख्या लाखों रोगियों के रूप में सामने आ रही है, कई लोग तो इस वायरस के कारण स्वर्ग सिधार गए ,बड़े-बड़े दावे किए गए, दीपक जलाए गए, थाली पीटी गई ,लेकिन कोरोना वायरस महामारी का रूप लेता जा रहा है। यहां तक किं कोरोना वायरस के नाम पर सरकारी विमानों का दुरुपयोग कर हेलीकॉप्टरों से फूल बरसाए गए ।
अभी युद्ध जारी है हमने कभी भी बीच युद्ध में सैनिकों का सम्मान होते हुए नहीं देखा, युद्ध विजय हासिल करने के बाद यह सब होता है और अच्छा भी लगता है। लेकिन एक तरफ लोग कोरोना वायरस से बेमौत मर रहे हैं, यहां तक कि उनकी देखभाल करने वाले डॉक्टर ,नर्स सहित मेडिकल स्टाफ के लोग भी इसका शिकार हो रहे हैं, मीडिया के लोग जो खबरें कवर करने जाते हैं उनकी भी मौत कोरोना वायरस के चलते हो रही है और उनको आर्थिक सहायता के रूप में मात्र ₹200000 रुपए देकर सरकार है अपने आप को बड़ी कृपा करने वाली बनती दिखाई दे रही हैं ।
सड़कों पर पैदल चलने वाले मजदूरों को रोका जा रहा है, लाठियां बरसाई जा रही है, उनके लिए परिवहन के साधन बंद कर दिए गए हैं, बिना कुछ खाए पिये सैकड़ों किलोमीटर का पैदल सफर तय करके मजदूर सरकारी गलतियों का खामियाजा भुगत रहे हैं, जब देश में मात्र 400 कोरोना वायरस के मरीज थे, तब जनता कर्फ्यू लगाया गया ,अचानक लॉक डाउन की घोषणा की गई और लोगों को घरों में रहने के लिए मजबूर कर दिया गया, इतना ही नहीं सरकार के कृपा पात्र संगठनों को लोगों की सहायता करने के लिए लगाया गया।
एक तरफ लोगों की सहायता चल रही थी, दूसरी तरफ पुलिस लाठियां बजा रही थी, स्कूलों में खाने के लिए कैंप खोले गए थे, वहां तक पहुंचते-पहुंचते मजदूरों को पुलिस के लाठी-डंडों से दो चार होना पड़ता था, पहले लाठी खाओ फिर भोजन पावो, वह भी जैसा सरकार खिलाए वैसा, लाखों लोगों को रोजाना खाना खिलाने का दावा किया गया ढोल पीटा गया, हमसे बड़ा दानी दुनिया में कोई नहीं है, लेकिन जब मौके पर गए तो खाना ऐसे बंटता हुआ मिला जैसे ऊंट के मुंह में जीरा, कई माताओं को तो अपने बच्चों के दूध के लिए भीख मांगते हुए देखा और उनकी दास्तान सुनी, पूरी महामारी में ना कोई मंत्री ना कोई संत्री, जनता के बीच दिखाई दिया।
जो देश के कर्णधार है उन्होंने केबल टीवी पर आकर संदेश देने में ही अपनी भलाई समझी, कोरोना वायरस का खतरा ऐसा कि मीटिंग भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा करते हुए दिखाई दिए । इक्का-दुक्का नेता कोई अगर गरीब के बीच पहुंच गया, तो सारा सरकारी अमला उसके पीछे पड़ गया, उसकी आलोचना करने के लिए नए-नए तरीके इजाद किए गए, फर्जी फोटो बनाकर पोस्ट किए गए, मजदूरों को करोड़पति बताया गया, जन दबाव में एवं बदनामी के डर से कुछ श्रमिक ट्रेन चलाई गई ,लेकिन भूखे प्यासे अप्रवासी मजदूरों से मनमाना टिकट का पैसा लिया गया और उसके बावजूद भी गाड़ी भटक कर अपने गंतव्य स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंच गई।
ऐसा आश्चर्यजनक चमत्कार इस देश में पहली बार देखने को मिला लोगों के रास्ता भटक जाने का समाचार तो कई बार देखा था, ट्रेन रास्ता भटक कर दूसरे शहरों में चली जाए, ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है।
सवाल यह है इन सब साजिशों के पीछे कौन खेल खेल रहा है, कौन है दुश्मन, अप्रवासी भारतीय मजदूरों का। गरीबों को ठिकाने लगाने वाला कौन खेल रहा है, यह सब खेल क्यों हो रहा है ? जो देश के पूंजीपति हैं उन्होंने अपनी तरफ से कोई राहत सामग्री नगरों में नहीं बाँटी, इक्का-दुक्का लोग राहत सामग्री बांट कर फोटो खिंचवाने में व्यस्त रहें।
नकली योद्धा ना बने लोगों की यथासंभव मदद करें और कोरोना वायरस से बचने के तरीके को पूरी तरह से अपनाएं ,जब भी किसी चीज को छुएं तो साबुन से हाथ धोएं,सैनिटाइजर खरीदने के पैसे गरीबों के पास नहीं है, साबुन की बट्टी ₹5 में आती है और एक माह चलती है, भोजन भी साफ सुथरा और घर का करें ,बाजार का खाने से बचें, यही सावधानी अपना कर अपने और अपने परिवार के जीवन को बचा सकते हैं और कोई रास्ता नहीं है। कोरोना वायरस के नाम पर जो जगह जगह लूट मची है उसका विरोध करें। सरकारी धन को लूटने से बचाएं यह पैसा जनता का है।
बेशक कोरोना वायरस से दुनिया में मौतों का तांडव हो रहा है, लेकिन भारत में अज्ञानी लोगों के कारण धर्म संकट पैदा हो गया है, यहां कितने लोग मरेंगे कितने लोग बचेंगे इस बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता। लोग सरकारी झांसे में ना आएं अपना बचाव स्वयं करें, लोगों से दूरी बनाकर रखें, गमछा से नाक और मुंह बांधकर रखें एवं आना जाना कम करें, यही बचाव है। सरकार तो कोरोना वायरस के मरीजों को इलाज के नाम पर ले जाती है इलाज कोई है नहीं। अखबार बाजी हो रही है।
मरीज की मौत होने पर बिना पोस्टमार्टम किए सरकार खुद ही अपने हिसाब से दाह संस्कार करवा रही है।