*इतिहास में पहली बार उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग इलाहाबाद से चयनित कृषि प्राविधिक सहायक ग्रुप-सी विगत 5 वर्षों से नियुक्ति से वंचित न्याय की प्रतिक्षा में **

*अपील -न्याय की प्राप्ति हेतु*

*उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग इलाहाबाद द्वारा कुल 6599 कृषि प्रा0स0 ग्रुप-सी के चयनित अभ्यर्थियों में शेष 906 अभ्यर्थी जिसमें (241 अन्य पिछड़ा वर्ग व 665 अनुसूचित जाति + अनुसूचित जनजाति ) के चयनित कृषि प्राविधिक सहायक ग्रुप-सी का दुर्भाग्य*

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग इलाहाबाद द्वारा 10 अक्टूबर 2013 में कृषि प्राविधिक सहायक ग्रुप-सी भर्ती में कुल पद 6628 जिनका संशोधित विज्ञापन के द्वारा आवंटन किया गया सामान्य वर्ग 2515 अनुसूचित जाति 1882 अनुसूचित जनजाति 201 एवम अन्यपिछड़ा वर्ग 2030 का विज्ञापन निकाला गया था l जिसकी लिखित परीक्षा 30 मार्च 2014 में कराई गई थी जिसके बाद लिखित परीक्षा का परिणाम 15 सितम्बर 2014 को घोषित किया गया जिसमें सफल अभ्यर्थियों को साक्षत्कार के लिए बुलाया गया और उनका साक्षत्कार 27 अक्टूबर से 24 दिसंबर 2014 तक कराया गया था l जिसके पश्चात अंतिम रिजल्ट 21 मई 2015 को घोषित किया गया जिसमें 6599 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया था शेष 29 पदो पर रिजल्ट रोक लिया गया था फिर कुच्छ समय बाद भर्ती प्रक्रिया को उच्च न्यायालय इलाहाबाद में याचिका न0.34196/2015 के तहत अचयनित अभ्यर्थी मनीष उपाध्याय के द्वारा चेलेंज किया गया था l जिसके बाद 6599 चयनित अभ्यर्थियों द्वारा उच्च न्यायालय इलाहाबाद में एक याचिका दाखिल की गई तद्पश्चात 15 दिसम्बर 2015 को उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा आदेश हुआ कि 6599 अभ्यर्थियों को एक माह के अन्दर नियुक्ति देदी जाए और नियुक्ति उच्च न्यायालय इलाहाबाद के अंतिम आदेश के अधीनस्थ रहेगी जिसके बाद कृषि निदेशक कृषि विभाग लखनऊ उत्तर प्रदेश द्वारा 5693 चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति दे दी गई किन्तु उसी भर्ती के शेष 906 अभ्यर्थी जिसमें (241 अन्य पिछड़ा वर्ग व 665 अनुसूचित जाति + अनुसूचित जनजाति ) के चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति से वंचित रखा गया जिसके बाद 906 चयनित अभ्यर्थियों में से एक अभ्यर्थी महताब सिंह याची की याचिका पर 2 मार्च 2016 को उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा 906 चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति देने का आदेश दिया गया लेकिन इनको कृषि निदेशक कृषि विभाग लखनऊ उत्तर प्रदेश द्वारा नियुक्ति से वंचित रखा गया चयनित अभ्यर्थी कृषि निदेशक कृषि विभाग लखनऊ उत्तर प्रदेश के आगे गिड़गिड़ाते रहे लेकिन कृषि निदेशक पर कोई असर नही पड़ा इसी तरह समय गुजरता गया फिर कुच्छ समय बाद उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा रिट न0.34196/2015 पर 15 नवम्बर 2015 को आदेश सुरक्षित कर लिया गया जिसको 10 फरवरी 2017 को 6628 कृषि प्राविधिक सहायक ग्रुप-सी भर्ती पर उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा अंतिम आदेश सुनाया गया जिसमे लिखित परीक्षा को सही माना गया और साक्षत्कार को रद कर दिया गया और पुनः साक्षत्कार कराकर रिजल्ट घोषित करके नियुक्ति देने का आदेश पारित किया गया जिस आदेश के बाद 5693 कृषि प्राविधिक सहायक जो नियुक्ति पा चुके थे उनके द्वारा सुप्रीमकोर्ट में अपील करके उच्च न्यायालय के आदेश पर स्टे (स्थगन) आदेश पारित करा लिया गया था l जिसके बाद 906 नियुक्ति से वंचित अभ्यर्थियों के द्वारा सुप्रीमकोर्ट में नियुक्ति पाने के सन्दर्भ में एक याचिका दाखिल की गई जिसपर सुनवाई शुरू हुई जिससे नियुक्ति से वंचित चयनित अभ्यर्थियों के जीवन में एक उम्मीद जगी उनको लगा कि सुप्रीमकोर्ट के अंतिम आदेश में मुझे भी न्याय मिल जाएगा और मुझे भी नियुक्ति मिल जाएगी मगर 906 चयनित अभ्यर्थियों के जीवन का वह अशुभ काला दिन जिस दिन अन्यपिछड़ा वर्ग व अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति की जिंदगी एक जिंदा लाश बन गई जब 30 सितम्बर 2019 को सुप्रीमकोर्ट की डबल बेंच श्रीमती जस्टिस आर0 भानुमती व श्री जस्टिस ए0एस0 बोपन्ना के अध्यक्षता में जो अंतिम आदेश पारित हुआ उसमें 6628 कृषि प्राविधिक सहायक ग्रुप-सी भर्ती प्रक्रिया को एवम 20 सितम्बर 2014 के संशोधित विज्ञापन के साथ उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग इलाहाबाद के अंतिम परिणाम में सफल 6599 अभ्यर्थियों को सही माना गया और 6599 चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्त भी दरशाया गया हैं l और उसी आदेश में 906 चयनित अभ्यर्थियों को यह कहकर नियुक्ति देने से रोक दिया गया कि आरक्षण अधिनियम 1994 के तहत आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक है जबकि भर्ती प्रक्रिया कैडर के अनुसार हुई थी यानी जिसके जितने पद रिक्त थे उस पर भर्ती की गई थी l फिर भी चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने से रोक दिया गया और बाहर का रास्ता दिखा दिया गया जिसके बाबजूद 906 चयनित अभ्यर्थियों में नियुक्ति पाने की आशा खत्म नही हुई और सुप्रीमकोर्ट में क्लेरीफिकेशन फाइल दाखिल कर दी उसको भी खारिज कर दिया गया l जिसके बाद भी 906 चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति पाने की आशा समाप्त नही हुई और 14 जनवरी 2020 को सुप्रीमकोर्ट में रिव्यू पिटिशन न0.1746 दाखिल कर दी जिस रिव्यू पिटिशन को 19 मई 2020 को खारिज कर दिया गया इस तरह 906 चयनित अभ्यर्थी जिसमें (241 अन्य पिछड़ा वर्ग व 665 अनुसूचित जाति + अनुसूचित जनजाति )वर्गो के चयनित अभ्यर्थी हैं जो नियुक्ति से वंचित हैं उनके जीवन मे अंधकार ही अंधकार आ गया हैं मानो जिंदगी जिंदा लाश हो गई हो ना जिया जाता हैं और ना ही मरा जाता हैं l यहां भी 906 चयनित अभ्यर्थियों को सुप्रीमकोर्ट से भी न्याय नही मिला है ।