विलायती कीकर एनसीआर के पर्यावरण का शत्रु

विलायती कीकर एनसीआर के पर्यावरण का शत्रु 1870 में भारत में अंग्रेजों द्वारा दक्षिण अमरीकी देशों मेक्सिको से लाया गया विलायती कीकर (वानस्पतिक नाम : Prosopis juliflora / प्रोसोपीस् यूलीफ़्लोरा) का झाड़ीनुमा पेड़ भूजल पर्यावरण व वानस्पतिक विविधता का सबसे बड़ा शत्रु है किसी भी जलवायु में होने वाला यह पेड़ भूजल को तेजी से सोख लेता है इसकी जड़ जमीन के नीचे 30 फीट तक समा जाती है भू जल संकट को तेजी से बढ़ाया है विलायती कीकर के आसपास अन्य देसी वृक्ष नीम कदंब बड ढाक व जड़ी बूटियां सहित दर्जनों महत्वपूर्ण वनस्पतियां नष्ट हो जाती है अपने आसपास यह किसी अन्य वृक्ष को फलने फूलने नहीं देता यह स्वदेशी वृक्षों का सबसे बड़ा शत्रु है राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की वनस्पति विविधता को विलायती कीकर ने तेजी से नष्ट किया है 1933 से लेकर 1935 तक अंग्रेजों ने दक्षिणी हरियाणा दिल्ली में उसके आसपास गौतम बुध नगर आदि में विलायती कीकर के बीजों का हवाई जहाज से छिड़काव किया था अंग्रेजों ने तर्क दिया था वह बढ़ते रेगिस्तान को रोकना चाहते हैं दूसरा हास्यास्पद तर्क उन्होंने दिया था कि भारत में जलावन के लिए ईंधन लकड़ी की कमी है यह उसकी पूर्ति करेगा गुजरात राजस्थान दक्षिण भारत में भी इसे लगाया गया सैकड़ों वर्ष पुराना अंग्रेजों का हरित षड्यंत्र आज अपना दुष्प्रभाव दिखा रहा है

दिल्ली व उसके आसपास 500000 एकड़ से अधिक के भूभाग पर आज विलायती कीकर का आधिपत्य है दिल्ली विश्वविद्यालय सहित तमाम शोध संस्थान पर्यावरणविदों ने विलायती कीकर के पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को सिद्ध कर दिया है दिल्ली हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दिल्ली से विलायती कीकर को मुक्त करने की कार्य योजना पर काम चल रहा है इस मामले में गौतम बुध नगर फरीदाबाद गुरुग्राम मे आज तक कोई योजना नहीं बन पाई है जबकि तीनों में भूमिगत जल स्रोत डार्क जोन से भी नीचे पहुंच गया है यहां पाई जाने वाली देसी वृक्षों की लाभकारी दर्जनों प्रजातियां नष्ट हो गई है बुजुर्ग जिन छोटे पौधों वृक्षों की बात करते थे वह आज खोजने से भी दिखाई नहीं देते फरीदाबाद गुरुग्राम की अरावली पर्वतमाला की जड़ी बूटी विविधता को नष्ट किया है पिछले 100 वर्षों में भारत के किसान अंग्रेजी राज से ही चिल्ला रहे हैं कि है यह पेड़ जमीन के पानी को सोख लेता है जिम्मेदार विभागों को आज तक समझ में नहीं आ रहा गौतमबुध नगर वन विभाग आज भी अंग्रेजों के पद चिन्हों पर चल रहा है 2 वर्ष पहले ही दादरी ब्लॉक के खदेड़ा गांव के पास भारी संख्या में विलायती कीकर के हजारों पेड़ लगाए गए हैं अब आप सोच सकते हैं सरकारी मशीनरी कितनी जागरूक है आम आदमी संगठनों को इस मुहिम को खुद बढ़ावा देना होगा अंग्रेजों की इस खतरनाक सौगात से अपनी धरा को मुक्त करना होगा