बुद्धि का बल” ( बोध कथा)

मैं सुबह रसोई में कार्यरत थी। धर के पिछवाड़े में बने कमरे से कुछ आवाजें सुनाई दी।घर के पिछवाड़े में बिल्ली और चूहा रहते हैं।लेकिन बिल्ली और चूहे के अलावा ये तीसरा कौन है?मै अचंभित थी। वो जो भी था चूहा और बिल्ली दोनों उसे भाग जाने को कह रहे थे।मैं बिना किसी आहट के पीछे जाती हूँ और देखती हूँ कि बिल्ली और चूहा एक मोटे बिल्ले से झगड़ रहे हैं ,और कह रहे हैं ” भाग यहाँ से, जिन पैरों से आया है उन्हीं पैरों से भाग जा, वरना अच्छा नहीं होगा” बिल्ले ने मुझे देख लिया और भाग निकला, जाते जाते बिल्ली को धमकी दे गया”ठीक है अभी जा रहा हूँ, लेकिन कल फिर आऊँगा” नहीं तुम यहाँ कभी नहीं आओगे ,समझे चूहे ने कहा।बिल्ला भागते हुए नजर आया। घर काम में मदद करने वाली बहन के लिए बने कमरे को साल भर से खाली देख चूहे और बिल्ली ने उसमें अपना ड़ेरा ड़ाल दिया।पहले बिल्ली आई,खिड़की से न जाने कब कमरे से घुस कर रहने लगी ।एक दिन मैं खुरपी लेने पीछे गई,तो कमरे से बिल्ली के बच्चों की आवाज सुनाई दी, कमरे का दरवाजा खोला तो पाया कि कमरे में रखी बांस की टोकरी में बिल्ली के चार बच्चे रखे थे,बिल्ली को मैंने दूघ रोटी देना शुरू कर दिया और वो हमारे घर की होकर रह गई ।बच्चे बड़े होकर चले गए,शायद उन्होंने अपने घर ढूंढ लिए ।बिल्ली रोजाना सुबह,दोपहर और शाम रसोई के दरवाजे पर आकर म्यांऊ म्यांऊ करती और मै उसे दूध रोटी दे देती।खाकर वह कम्पाउंड में यहां वहां बैठी रहती मैं जब पेड़ पौधों में पानी डालने या तुलसी, पुदीना लेने जाती वह म्याऊं म्याऊं करके बातें करती,वो हमारे घर में हक़ से रहने लगी जैसे पालतू हो, घर के किसी भी सदस्य से वह ना डरती।बच्चे उसे छूते कुछ ना कहती।फिर अचानक एक दिन वह एक चूहे के बच्चे को साथ लेकर आई, मुझे बहुत आश्चर्य हुआ,बिल्ली की सूरत को देख कर लगा जैसे कह रही हो माँ बाप से बिछड़ गया है, अभागा ,इसे भी यहाँ रहना है।खैर– मैं दूध रोटी देती दोनों प्यार से खा कर खेलते, दोनों बड़े प्यार से रहने लगे। दोनों रसोई और कमरे के बीच खड़े आम के पेड़ पर टाॅम और जैरी की तरह चढ़ते उतरते, लेकिन बिल्ली की एक एक आदत अच्छी थी, कि पेड़ पर रहते पंछियों गिलहरी, चिड़िया आदि को कोई नुकसान नहीं पहुँचाती ।एक दिन मैं रसोई में खाना बना रही थी कि चूहे कि रोने की आवाज आई, रोते हुए कह रहा था “मेरी माँ मुझे ढूंढ रही होगी, मुझे माँ याद आ रही है” बिल्ली चूहे को सांत्वना देते हुए कह रही थी, तुम परेशान मत हो यदि माँ ढूंढती आ जाये तो चले जाना,यूँ अकेले तुम्हारा बाहर जाना ठीक नहीं । इतने में बिल्ला आ गया, चूहे की तरफ लपका। चूहा भाग कर बिल्ली के पीछे छुप गया ।बिल्ली ने उसे खदेड़ कर भगा दिया ।देख लूँगा कहते हुए भाग गया ।उसके जाने के बाद चूहे ने कहा ये तो अक्सर आ जाता है, हमें सताने ।हमें इसे सबक सिखाने के लिए कुछ सोचना होगा, हाँ तुम ठीक कहते हो बिल्ली बोली ।वो हमसे ताकतवर है ,हमें बुद्धि बल का प्रयोग करना होगा । पास वाले घर में जो आंटी रहती थी वो बिल्ली ,बिल्ले से बहुत चिढ खाती थी, आवाज सुनते ही तुरंत दंड़ा लेकर दौड़ती थीं, किंतु चूहा गणेश जी का वाहन है इस नाते चूहों को कभी नहीं मारती थीं। बिल्ला उनके घर की दीवार लांघ कर ही आया करता था। बिल्ली चूहे को अपनी योजना समझाते हुए कहती है “मेरी बात ध्यान से सुनो हमें बिल्ले पर नजर रखनी है, वो जैसे ही आयेगा तुम्हें आंटी के घर के दरवाजे से थोड़ी दूरी पर मर जाने की हालत में लेट जाना है, जैसे ही वह दीवार कूद कर आएगा, मैं म्यांऊ म्यांऊ चिल्लाना शुरू कर दूंगी,आंटी दंड़ा लेकर दौड़ते हुए आयेगी  तुम्हें मरा हुआ देख कर और बिल्ले को सामने देख कर उसे खूब मारेंगी, फिर ये कभी इधर नहीं आयेगा। “अरे लेकिन आंटी नहीं आई तो ये तो मुझे खा जायेगा ।,मैं पास ही छुप कर खड़ी रहूंगी, तुरंत तुम्हें मुंह में दबा कर दौड़ कर अपने घर ले आऊँगी । एक दिन ऐसा ही हुआ योजना के मुताबिक सब काम हुए, आंटी को मरे हुए चूहे को देख बहुत गुस्सा आया ।उन्होंने जोर से दंड़ा फैंक कर बिल्ले पर वार किया ।बिल्ले की पीठ पर जाकर दंड़ा पड़ा उसकी सिट्टी पिट्टी गुम हो गई। वह दुम दबा कर भाग गया ।इतने में ही चूहा भी वहाँ से भाग निकला ।इस तरह हमेशा के लिए बिल्ले से छुटकारा मिल गया ।अपने बुद्धि बल से चूहे और बिल्ली ने बिल्ले से छुटकारा पा लिया। बिल्ली और चूहा दोनों खुशी खुशी रहने लगे ।

. डा मीरा रामनिवास

ये गुजरात कैडर की पूर्व आ ई पी एस पुलिस अधिकारी हैं