जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला

 

राजस्थान हाई कोर्ट ने प्रदेश सरकार से रियायती दरों पर जमीन और विभिन्न सुविधाएं लेने वाले निजी अस्पतालों एवं चैरिटेबल अस्तपालों को कोरोना मरीजों का सरकार की एडवायजरी के अनुसार समुचित इलाज मुफ्त करने के निर्देश दिए हैं। न्यायाधीश गोरधन बाढ़दार और न्यायाधीश बी के सोनगरा ने यह आदेश सरकार के जवाब के आधार पर शुचि सिंघवी जैन की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। प्रदेश सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने एडवायजरी पेश की। एडवोकेट समीर जैन ने बताया कि कोर्ट ने 12 मई को सरकार को नोटिस जारी कर इस मामले में सरकार द्वारा जारी किए गए सर्कुलर आदि मांगे थे और महाधिवक्ता ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के एसीएस द्वारा 30 मई को जारी एडवायजरी प्रस्तुत की। एडवायजरी में सरकार ने कहा कि सरकार से रियायतें और सुविधाएं लेने वाले निजी अस्पताल और चैरिटेबल अस्पताल कोरोना और अन्य गंभीर बीमारियों के मरीजों का उपचार करने के बजाय उनको सरकारी एवं अन्य अस्पतालों में जाने को बाध्य कर रहे हैं। यह वैश्विक महामारी के दौर में अमानवीय होने के साथ ही सामाजिक, नैतिक और व्यावसायिक दायित्वों से बचना है, जबकि सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे को गंभीरता से ले चुका है। राजस्थान में कोरोना वायरस की चपेट में 10 हजार से ज्यादा लोगकेंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार राजस्थान में अब तक 10084 लोग कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं, जिसमें से 218 लोगों ने अपनी जान गंवा दी है। आंकड़ों के अनुसार राजस्थान अब तक 7359 लोग इस महामारी से ठीक हो चुके हैं और कोरोना के 2507 एक्टिव केस मौजूद हैं।