सरकार दे रही कमाई का बड़ा मौका

 

मोदी सरकार ने कई ऐसे सेक्टर को आम लोगों के लिए खोलना शुरू कर दिया है, जो अभी तक बंद थे। इन्हीं में से एक सेक्टर है पेट्रोलियम सेक्टर। इस सेक्टर के एक रेगुलेटर पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड (पीएनजीआरबी) ने 2 दिन पहले ही एक आदेश जारी कर बताया है कि अब देश में एलएनजी स्टेशन स्थापित करने के लिए किसी भी प्रकार के लाइसेंस की आवश्यकता नहीं है। इसके बाद अब देश में कोई भी एंटिटी एलएनजी स्टेशन खोल सकती है। जैसे ही पीएनजीआरबी की ओर से यह घोषणा की गई वैसे ही देश की एक बड़ी कंपनी पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड ने इसका फैसले का स्वागत करते हुए बड़े प्लान का खुलासा कर दिया। कंपनी ने कहा है कि वह पूरे देश में एलएनजी स्टेशन स्थापित करने के लिए आवेदन लेना शुरू करेगी। क्या कहा है पेट्रोनेट एलएनजी ने पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड ने अपने आधिकारिक बयान में कहा गया है कि पीएनजीआरबी के फैसले के बाद कंपनी पूरे देश में एलएनजी स्टेशन स्थापित करना चाहती है। इसमें देश के मुख्य नेशनल हाइवे के किनारे एलएनजी स्टेशन स्थापित करना प्रमुख हैं। यदि इस प्रोजेक्ट में कोई ऑयल मार्केटिंग कंपनीज (ओएमसी), सीजीडी एंटिटीज या अन्य पार्टी भागीदार बनने की इच्छुक है, तो वे आवेदन कर सकते हैं।

ये है कंपनी का बयान, अगर पढ़ना चाहें तो नीचे दिए लिंक को –
https://www.petronetlng.com/PDF/Media%20Release_PLL_04.06.2020.pdf

गैस आधारित इकोनॉमी बनाने की ओर बढ़ा कदम पेट्रोनेट के एमडी और सीईओ प्रभात सिंह का कहना है कि कंपनी सरकार के देश को गैस आधारित इकोनॉमी बनाने और एलएनजी को कमर्शियल वाहनों के लिए स्वच्छ और ग्रीन गैस के रूप में प्रमोट करने के लिए सभी तरह के प्रयास करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि दिल्ली-मुंबई हाईवे के किनारे एलएनजी स्टेशन स्थापित करने के लिए कंपनी की तरफ से टेंडर निकाल दिया है। 25 फीसदी तक कम हो जाता है वाहनों का ईंधन का खर्च पेट्रोनेट के गुजरात के दहेज और केरल के कोच्चि में एलएनजी टर्मिनल हैं। यहां कपनी एलएनजी आधारित कमर्शियल बसों को चला रही है। यह बसें कंपनी के कर्मचारियों को लाने और छोड़ने का कार्य करती हैं। एक बार फिलिंग के बाद यह बसें 900 किलोमीटर तक का सफर तय कर लेती हैं। एलएनजी के इस्तेमाल से वाहन मालिकों के फ्यूल में का बिल कंपनी 25 फीसदी तक कम आ रहा है। अगर सरकार इस फ्यूल को बढ़ावा दे तो विदेशी मुद्रा की काफी बचत हो सकती है। इससे क्रूड के मुकाबले एलएनजी के आयात से देश का इंपोर्ट बिल 30 से 40 फीसदी तक कम किया जा सकता है।