साक्षात्कार

 बिहार के पूर्णिया के झूंनी कला की गुड़िया कुमारी का नाम हिंदी की नवोदित कवयित्रियों में शामिल है . साहित्य लेखन के अलावा इनका गहरा प्रेम अपने ग्राम्य परिवेश से भी है . प्रस्तुत है इनसे राजीव कुमार झा की बातचीत . . .
 Q.1. आप कवयित्री है और कविता लेखन की और आपका झुकाव कैसे कायम हुआ?
उत्तर:- जी खुद को कवयित्री कहना सही नहीं है क्योंकि मैं अभी उस स्टेज पे नहीं पहुँची हूँ बस अभी कविता लिखने का एक छोटा सा प्रयास है । समाज के इस प्रेम ,नफरत औऱ अपने जीवन से परेशान होकर मैं लिखना शुरू की थी और हमारी पहली कविता थी “हमारे युग का प्यार” । जब मैं दुःख, दर्द और समाज के अच्छाईयों और बुराईयों को दूसरों से शेयर नहीं कर पाती हूँ तो कलम लेखर लिखने बैठ जाती हूँ , औऱ एक कविता का सृजन हो जाता है , मेरी कविता मेरे मन के भाव होते हैं।।

Q.2. अपने घर परिवार के बारे में बताये?
उत्तर:- मैं मध्यमवर्गीय परिवार से हूँ । ,
मेरे परिवार में मेरे अलावा मेरी माँ ,पापा दादा , दादी मेरी तीन बहनें और एक भाई हैं।
एक कि शादी हो गई है बाक़ी अभी पढ़ाई कर रही है । पापा किसान हैं और माँ गृहणी ।।

Q.3.अंग्रेजी भाषा -साहित्य की छात्रा होने के बावजूद हिंदी के प्रति अपने लगाव के बारे में बताये?
उत्तर:- मैं स्नातक अंग्रेजी साहित्य से कर रही हूँ लेकिन मुझे अंग्रेजी से अधिक हिंदी साहित्य के प्रति लगाव है क्योंकि मैं बचपन से ही हिंदी मीडियम से अपनी पढ़ाई की हूँ और , मुझे कविता कहानी और शायरी पढ़ने का बहुत शौक था बचपन से ही, मैं विभिन्न पत्रिकाओं मैं प्रकशित कहानियों और कविताओं को पढ़ती थी और लिखने का प्रयास करती थी ।।

Q.4.अपने प्रिय कवियों और लेखकों के बारे में बताये?
उत्तर:- मेरे प्रिय कवि रामधारी सिंह दिनकर जी है ,जब पढ़ाई में मेरा मन नहीं लगता है या मन परेशान हो जाता है तो उनकी यह पंक्ति को याद कर लेती हूँ ” अब याचना नही रण होगा जीवन जय या मरण होगा,” इस पंक्ति में इतनी ऊर्जा है कि इसे पढ़ने के बाद ही हर परेशानी दूर हो जाता है औऱ मैं अपने लक्ष्य के लिए मेहनत करने लगती हूँ। मेरे प्रिय लेखक फणीश्वरनाथ रेणु औऱ मुंशी प्रेमचन्द है मुझे ये इसलिये भी पसंद है क्योंकि दोनों ने ग्रामीण समस्या को बखूबी समझा और अपने उपन्यास में गांव के माटी को चंदन बनाकर प्रस्तुत किया है, रेणु की अनुपम कृति है “मैला आँचल” जिसमे पुर्णिया के ग्रामीण परिवेश को बेहतरीन ढंग से दिखाया गया है और प्रेमचंद का गोदान जिसमें किसान पर हो रहे अत्याचार को बतलाया गया है।। अगर मैं आधुनिक लेखकों की बात करूं तो मैं ” मैडम मीनाक्षी सिंह” से काफी प्रभावित हूँ उनकी कलम समाज के हर विषय पर चली है वो अपने काव्य संग्रह “बस तुम्हारे लिए” मैं समाज के हर एक पहलू को बेहतरीन तरीके से प्रस्तुत की है।।

Q.5.पुर्णिया रेणु की धरती है अपने अंचल की सांस्कृतिक गरिमा के बारे में बताये?
उत्तर:- फणीश्वर नाथ रेनू के सांस्कृतिक योगदान ने पूर्णिया को एक अलग पहचान दीफणीश्‍वर नाथ रेणु का जन्म 4 मार्च 1921 को औराडी हिंगन्ना, जिला पूर्णियां, बिहार में हुआ।यह आजीवन शोषण और दमन के विरूद्ध संधर्षरत रहे।1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भी इनका योगदान रहा। इनकी लेखन-शैली वर्णणात्मक थी जिसमें पात्र के प्रत्येक मनोवैज्ञानिक सोच का विवरण लुभावने तरीके से किया होता था।
पूर्णियां साहित्य के लिए सदा से उर्वर उर्वर भूमि रही है। आंचलिक कथाकार रेणु के गुरु भी पूर्णियां के है जिनके यहाँ रहकर रेणु ने साहित्य की गहराई को समझा इतना ही नही राष्ट्रकवि दिनकर की कालजयी रचना रश्मिरथी के कुछ सर्ग और शीर्षक का निर्माण उन्होंने पूर्णियां कॉलेज पूर्णियां मे रहकर किया था। उर्दू के मशहूर शायर लेखक शम्स जमील, द्विज जी का सम्बंध पूर्णियां से रहा है। पूर्णियां की साहित्यिक सांस्कृतिक गरीमा की बात करू तो सुबह से शाम हो जाएगी।।
Q.6.बिहार का साहित्यिक परिवेश आपको कैसा प्रतीत होता है?
उत्तर:- हिंदी साहित्य के विकास और संवर्धन में बिहार का योगदान उल्लेखनीय रहा है। बिहार की साहित्यिक भमि अनादि काल से हीं उर्वर रही है , अनादिकाल के प्रसिद्ध कवि विद्यापति जो प्रेम और भक्ति के लिए प्रसिद्ध उनका जन्म बिहार में ही हुआ है। आधुनिक काल के प्रसिद्ध राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर का जन्मस्थल भी बिहार का बेगूसराय जिला है एवं प्रसिद्ध उपन्यास मैला आँचल के लेखक फणीश्वरनाथ रेणु जी का जन्म भी बिहार के पुर्णिया ज़िलें में हुआ था। अतः बिहार का साहित्यिक परिवेश अदभुत रहा है ।।।
Q.7. यह देश का अत्यंत पिछड़ा राज्य है यहां के नये समाजिक परिवेश में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित कीजिये?
उत्तर:- हाँ ये बिल्कुल सत्य है कि बिहार देश का अत्यंत पिछड़ा राज्य रहा है वर्तमान शिक्षा व्यवस्था भी उतनी अच्छी नही है फिर भी अन्य क्षेत्रों की तरह समाजिक क्षेत्र में भी महिलाओं की भूमिका उत्कृष्ट रही है। नये परिवेश में महिलायें पुरूषों के साथ कंधे से कंधे मिलाकर समाजिक क्षेत्र में अपना अप्रितम योगदान दे रही है। यहाँ तक कि अब बिहार की महिला पुरुषों से भी बेहतर कृषि कार्य करने लगी है, बिहार के मुजफ्फरपुर की किसान चाची जैविक खेती के लिये लोगों को प्रेरित करती है अतः कृषि में उत्कृष्ट योगदान देने का कारण उन्हें पद्मश्री सम्माम से भी सम्मानित किया गया है।।।
Q.8. साहित्य के अलावा आप अन्य क्षेत्रों में अपनी अभिरुचि के बारें में बताये?
उत्तर:-साहित्य के अलावा हमारी अभिरुचि समाज सेवा , परिवार की सेवा , गरीबों और असहायों की मदद करने में है इसके अलावा मेरी अभिरुचि उन तमाम कार्यों को करने में है जिसे करने से मुझे खुशी मिलती है, जैसे–संगीत सुनना , बच्चों का पढ़ाना, बच्चों के साथ खेलना ,दोस्तों के साथ समय बिताना तथा जरूरत पड़ने पर दोस्तों की मदद करना ।।

Q.9.बिहार खासकर पुर्णिया का आँचल अपनी लोग संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है , इसके बारे में आप क्या कहना चाहती हैं?
उत्तर:-पुर्णिया लोक संस्कृति के लिये बिहार ही नही अपितु सम्पूर्ण भारत में प्रसिद्ध है। ज़िलें में स्थित कलाभवन
नाट्य विभाग , लोक गीत  रंगकर्मी विश्वजीत को लोक विद पुरुस्कार से पुरुस्कृत किया गया है।।

Q.10.युवा कवयित्री के रूप में आप अपने सपनों और अरमानों को किस तरह शब्द देना चाहती हैं?
उत्तर:-प्रत्येक रचनाकार का धर्म होता है कि वह समाज के बीच अपने दायित्व का निर्वहन राष्ट्र से लेकर घर परिवार और स्वयं के स्वाभिमान की रक्षा में पूरी निष्ठा और लगन के साथ कार्य करते हुए संपादित और संपन्न करता रहे।
इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए मैं अपने मन वचन और कर्म से साहित्य सर्जन करने की दिशा में प्रयासरत हूं।
ईश्वर की कृपा और मां सरस्वती का आशीर्वाद मेरे साथ है।
अपने से बड़ों का शुभ आशीष उनकी शुभकामनाएं और उनका शुभचिंतन मेरे लिए शुभ परिणाम प्रदान करने वाला सिद्ध हो रहा है।
मैं अपने कर्म पथ पर अग्रसर हूं।
नाम :- गुड़िया कुमारी
जन्मतिथि:- 22.10.2000
माता:- अनिता देवी
पिता:- भोला यादव
जन्मस्थान:- झुंनी कला पुर्णिया बिहार

पता:-
ग्राम+पोस्ट:- झुंनी कला
प्रखंड:- श्रीनगर
जिला :- पुर्णिया
राज्य :- बिहार
मो. :- 7667897508(व्हाट्सएप्प नंबर)
ईमेल:- kumariguriya5432@gmail. com

शिक्षा:- मेट्रिक :- Govt Girls High school purnia 2016(1st division) इंटर:- पुर्णिया महिला महाविद्यालय पुर्णिया 2018(1st division) अंग्रेजी साहित्य से स्नातक में अध्ययनरत(2nd part) पुर्णिया महिला महाविद्यालय पुर्णिया विभिन्न पत्र पत्रिकाओं अखबार में प्रकाशित कविता लगभग एक वर्ष से लेखन कार्य अभिरुचि:-कविता शायरी लखुकथा