समाजसेवी युवाओं ने प्रशासन की सहायता से रुकवाया मृत्युभोज

 

मांडल-आज पूरा देश कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहा है सरकार बार-बार सोशल डिस्टेंसिंग के लिए सतर्क कर रही है लेकिन ऐसे वक्त में भी लोग मृत्युभोज जैसे आयोजन धडल्ले से कर रहें हैं ऐसा ही मामला भीलवाड़ा जिले के माण्डल तहसील के कालूखेडा़ गांव का सामने आया जिसमें रुपा बलाई की लगभग दो माह पूर्व मृत्यु हो गई थी उस दौरान लोकडाऊन के कारण मृत्युभोज नहीं किया जा सका लेकिन जैसे ही लोकडाऊन में ढील दी गई रुपाबलाई के पुत्र देवीलाल बलाई ने आस-पास के लोगों को आमंत्रित कर वृहद स्तर पर मृत्युभोज का आयोजन कर दिया जब इस आयोजन की सूचना समाज के युवा जो मृत्युभोज निवारण हेतु सोशल मीडिया पर जागृति का काम कर रहे इस सामाजिक कुरीति को मिटाने का प्रयास कर रहें हैं उन्होंने रुपा बलाई के परिवार जनों से मृत्युभोज नहीं करने की अपील की किन्तु वह बेअसर रही तो उन्होंने मांडल थाने में और माण्डल उपखण्ड अधिकारी को दूरभाष पर इसकी शिकायत कर मृत्युभोज रुकवाने के लिए अनुरोध किया और प्रशासन ने मौके पर पहुँच कर कार्यवाही करते हुए मौका मुआयना किया जिसमें जीमने आए लोगों को भनक लगने से वो वहाँ भग गए एवं पुलिस कर्मियों को मौके पर काफी मात्रा में मिठाई से भरे पात्र और भट्टी पर गर्म तेल की कडाई मिली उसके बाद संबंधित आयोजन कर्ता को भविष्य में मृत्युभोज नहीं करने हेतु पाबंद किया। समाज के युवाओं ने प्रशासन से अपील की है कि ग्राम पंचायत के पंच,सरपंच,पटवारी,सचिव जो कि मृत्युभोज निवारण अधिनियम 1960 के तहत मृत्युभोज के आयोजन की सूचना देने हेतु जिम्मेदार है लेकिन उनके द्वारा इसकी अनदेखी की जाती है और लोग धडल्ले से मृत्युभोज करते हैं। इसलिए प्रशासन जिम्मेदार लोगों को भी पाबंद करें ताकि समाज से यह कुरीति समाप्त हो और किसी व्यक्ति को घर,जमीन और जेवर बेचने को मजबूर न होना पडे़। जागरुक युवा सोशल मीडिया के माध्यम से जागृति की पहल कर समाज को बर्बाद करने वाली कुरीति को समाप्त करने हेतु मुहिम चला रहे हैं और लोगों को मृत्युभोज नहीं करने के लिए समझाने के उपरान्त भी नहीं मान रहे है मृत्युभोज का आयोजन करने पर निवारण अधिनियम 1960 की अनुपालना करवाने के लिए प्रशासन का सहयोग कर रहें हैं और प्रशासन अपेक्षा रख रहें हैं कि प्रशासन के सहयोग से यह कुरीति समाज से मिट सके।।