बेचें गये गन्ने का मूल्य पहले ही नही मिला

गगनमिश्रा

लखीमपुर खीरी। गुरुवार प्रातः हुई 1 घंटे की बरसात से खेत खलिहान पूरी तरह लबालब होकर तृप्त हो गए,मानो गन्ने की फसल पुनः संजीवनी मिल गई हो,।।
पानी बरसने से जहां किसानों के चेहरे पर रौनक दिखी वहीं, अब टाप डेसिंग के लिये यूरिया खाद की मारामारी है,किसान यूरिया खाद के लिये भटक रहा है और यूरिया पूरी तरह बजार से नदारद है। किसान के सिर पर समस्याओं का अंबार है पलिपा क्षेत्र मे “बेचें गये गन्ने का मूल्य पहले ही नही मिला ओर अब यूरिया खार के लाले पडे है जियें तो जियें कैसे” बड़ी विडंबना है पूरे जिले में यूरिया खाद की त्राहि-त्राहि मची हुई है ऊपर वाला तो प्रसन्न हो गया और बरसात कर दी लेकिन अब सरकारी मशीनरी और जिला कृषि अधिकारी की उदासीनता के चलते पूरे देश की आबादी को भोजन उपलब्ध कराने वाला किसान यूरिया के संकट से गुजर रहा है पूरे जिले में यूरिया खाद की त्राहि-त्राहि मची हुई है किसान ₹256 वाली यूरिया 320 से 350 तक खरीदने को विवश है इधर सरकारी समितियां समितियों मे खाद पूरी तरह से निल हैं प्राइवेट दुकान दार 320 से 350 तक ऊंचे दाम लेकर यूरिया खाद बेच रहे हैं। पानी बरसने के बाद गन्ने की फसल को टापसिंग के लिए यूरिया की जरूरत पड़ती है लेकिन तराई क्षेत्र के धौरहरा ,निघासन पलिया तथा गोला तहसील क्षेत्र में यूरिया की भारी किल्लत देखी जारही है।जानकारों का कहना है पूरे जिले में किसान यूरिया खाद के लिये मारा मारा फिर रहा है और उसे यूरिया उपलब्ध नहीं हो रही है गन्ने की फसल मारी जा रही है वहींं कुछ जमाखोर अधिक मूूूल्य पर पुराने स्टाक की यूरिया खाद को बेच रहे हैं। ज्ञात रहे जनपद का अधिकांश हिस्सा नेपाल बॉर्डर से जुड़ा है नेपाल में खाद की काफी किल्लत है तराई क्षेत्र से इलाके के अधिकाशं फुटकर विक्रेता खाद की तस्करी कर पड़ोसी राष्ट्र नेपाल भेज रहे हैं और भारत का अन्नदाता यूरिया के अभाव में अपनी फसल मारने पर विवश है।
यहां आज गुरुवार को सुबह हुई 1 घंटे की बरसात के बाद खेत खलिहान सब लबालब हो गए लेकिन पानी के बाद टापडेसिंगके लिए यूरिया को दर-दर भटक रहे किसानों का कोई पुरुषा हाल नहीं है पलिया और निघासन क्षेत्र के किसान केवल गन्ने की फसल पर ही आश्रित है क्योंकि यहां की निचली तराई की भूमि मे अन्य फसलें दगा दे जाती हैं गन्ना ही यहां की कैश क्रॉप है यदि इन दिनों गन्ने की फसल को यूरिया ना मिली तो गन्ना किसान पूरी तरह तबाह हो कर भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएगा।