पुस्तक समीक्षा

मेरे खत . कुसुम चौधरी . मधुलिका प्रकाशन . खत्री टोला . मशकगंज . लखन ऊ . 226018
कवयित्री कुसुम चौधरी के गजल संग्रह ‘ मेरे खत ‘ में संग्रहित उनकी गजलों में नारी मन का नैसर्गिक प्रेमभाव जीवन की अनेक रंगतों को लेकर प्रकट होता है . गजल काव्य की सबसे खूबसूरत मानी जाती है और ये बात इस संग्रह की गजलो को पढते हुए और भी बखूबी समझी जा सकती है . इसमें जीवन के विविध विषय सहजता से प्रकट होते हैं और सचमुच जीवन के तमाम सुंदर शब्दों के सहारे यथार्थ को अनुभूतियों में सिमटता देखा समझा जा सकता है . इस प्रकार यथार्थ के साथ कल्पना का सहज संयोग इस संकलन की गजलों की पहली विशेषता कही जा सकती है . कवयित्री ने इन गजलों को खत कहकर पुकारा है और इस रूप में इनमें उसके हृदय के आत्मीय राग विराग इन गजलों में समाये हैं और अपनी इस गुफ्तगू में उसने चाँद – सितारों के साथ हर मौसम और बहार के साथ दिल पर वार करने वाले जिंदगी की भूली बिसरी ठोकरों के साथ किसी के मन के गुलशन में बंद कली की मुस्कान से अपनी यादों के सफर को सजाते हर जगह खुशियों के ख्वाब से अपने अरमानों को लफ्जों में पिरोया है . सचमुच प्रेम हमारे जीवन का मूल भाव है और इस संग्रह की तमाम गजलों में जीवन के सुख दुख की सारी बातें इसी जीवनतत्व की विवेचना के आसपास प्रकट होती दिखायी देती हैं . इसमें प्रणय प्रतीक्षा के साथ हर सच्चे सुख की प्राप्ति के रूप में सबके आकुल व्याकुल मन की आहटों को भी निकट से देखा सुना जा सकता है . कुसुम चौधरी की कविताओं में जीवन के गहरे भाव विचार समाये हैं और इनमें समाहित जीवन स्वर मानवीय धरातल पर सबके मन प्राण को किसी अनहद में एकमेक करता प्रतीत होता है और इनमें हृदय की समस्त क्षुद्रताएँ सांसारिक धरातल पर सिमटती मिटती दिखायी देती हैं . प्रेम को मन का उदात्त भाव माना गया है और इसकी वैयक्तिकता के विस्तार में समाज और जीवन के सूक्ष्म अर्थ संकेतों को कुसुम चौधरी के इन गजलों में सुंदरता से पिरोया देखा जा सकता है -‘ गगन में खिले हैं ये जितने सितारे । हमें तुम हो इनसे जियादा ही प्यारे ॥ तुम्हारे बिना घर का आँगन है सूना । मेरा दिल मेरे मीत ! तुमको पुकारे ॥ ‘ कुसुम चौधरी के इन गजलों में व्यष्टि और समष्टि उसके आत्म और बाह्य के दो जीवंत तत्व के रूप में इन गजलों में निरंतर प्रकट होते हैं और कवयित्री की विविध भाव भंगिमाओं में यहाँ एक विस्तृत जीवन संसार उजागर होता है . इसमें सुबह का उजाला दोपहर की धूप शाम की खामोशी के साथ रात की जगमगाहट ये सब इन गजलों को जीवंत रूप रंग प्रदान करते हैं . यह एक पठनीय गजल संग्रह है . . .

राजीव कुमार झा . ह्वाटस अप 8102180299