बिहार में कोरोना और लाक डाउन से

राजीव कुमार झा
बिहार में राज्य सरकार के द्वारा कोरोना के लाक डाउन के कारण रोजी रोटी के खत्म होने से बेहाल काफी परिवारों को सस्ते और मुफ्त अनाज का राशन कार्ड सरकार के द्वारा मुहैया कराया गया है लेकिन यहाँ ऐसे काफी जरूरतमंद परिवारों में राशन कार्ड के वितरण का काम अभी भी बचा है . देश के दूसरे राज्य पंजाब – दिल्ली – गुजरात – महाराष्ट्र से भी भारी तादाद में प्रवासी मजदूरों की वापसी से भी नये संकट सामने आये हैं . राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इन प्रवासी मजदूरों को अब राज्य में ही रहकर यहाँ रोजगार के साधनों को ढूँढने की सलाह दी है . सरकार के द्वारा बाजार को खोलने का निर्णय लेने के बाद आर्थिक गतिविधियाँ और मौद्रिक लेन देन का प्रसार फिर शुरू हूआ है लेकिन राज्य के तमाम निजी विद्यालयों के शिक्षकों को अप्रैल महीने के बाद वेतन भुगतान बंद है हाल में राज्य के शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने अपनी एक बैठक में राज्य के सभी स्कूलों को कोरोना संक्रमण से बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर बंद रखने का निर्णय लिया है और इन स्कूलों में टयूशन फीस जमा नही होने के कारण शिक्षकों के बाधित वेतन भुगतान को लेकर सरकार की उदासीनता चिंताजनक है . इसे लेकर विद्यालय के संचालकों का कहना है कि फीस वसूली को लेकर सरकार के द्वारा जारी दिशा निर्देश असंतोषजनक हैं और इससे फीस चुकाने में सक्षम अभिभावकों से भी विद्यालय अपना बकाया फीस स्वीकार नहीं कर पा रहे . वेतन  सरकार के द्वारा सड़क परिवहन को भी अभी शुरू नहीं किया गया है लेकिन निजी गाड़ियों से समृद्ध तबकों के लोग सुगमता पूर्वक आना जाना करते दिखायी दे रहे हैं लेकिन साधारण और गरीब लोग अब भी अपने जरूरी कामों के लिए आसपास के शहरों में जाने की सुविधा से वंचित है .