योग आत्मिक ऊर्जा को जाग्रत करता है

आज अंतरराष्ट्रीय योग दिवस है . योग जीवन सा  ग्न रहता है उसे योग कहा जाता है . महर्षि पतंजलि ने हजारों साल पहले योगशास्त्र की रचना करके जीवन को सुंदर बनाने के बारे में हमें बताया था और कहा था कि योग: चित्तवृत्ति निरोध : अर्थात् अपने मन को विकारों से और कर्म को पापों से रहित करना ही योग है . सचमुच जीवन में विविध प्रकार के अपकर्म यानी अमानवीय – असामाजिक – अप्राकृतिक कार्यों से अपना बचाव ही योग है . इस संसार में मनुष्य का चंचल मन विषय वासनाओं से निरंतर अभिभूत होता रहता है और सांसारिक माया मोह से उपजे विचलन मनुष्य को जीवन पथ पर निरंतर अंधकार की ओर अग्रसर करते रहते हैं . योग की साधना से मनुष्य आत्मिक ऊर्जा से अपने जीवन पथ पर सांसारिक कर्मों में प्रवृत्त होता है और निर्वाण प्राप्त करता है . योग की साधना प्रकृति की सान्निध्यता में होती है और वर्तमान समय में प्रकृति के साथ जीना भी योग की साधना का ही दूसरा नाम है . योग ध्यान प्रणायाम और आसन से सुंदर भाव विचारों से हमें युक्त करता है और शांति की शीतल किरणों से मन प्राण को आह्लादित करता है . योग आहार विहार में सामंजस्य की शिक्षा हमें देता है . . .

राजीव कुमार झा . ह्वाटस अप 8102180299