जीवन को प्रेरणा और आशा के पुष्पों से सुवासित करने वाली लघुकथाएँ

पुस्तक समीक्षा

राजीव कुमार झा
पुस्तक : बूँदों का उपहार ( लघुकथा संग्रह ) , लेखिका : रंजना फतेपुरकर , प्रकाशक : रंजन कलश प्रकाशन , 53 B सेक्टर , इंद्रपुरी , भोपाल – 462021 , मध्य प्रदेश
जीवन को प्रेरणा और आशा के पुष्पों से सुवासित करने वाली लघुकथाएँ
सदियों से हमारी संस्कृति का श्रेष्ठ चिंतन साहित्य में विविध रूपों में प्रकट होता रहा है . मनुष्य के मन को साहित्य सदैव नये जीवन की प्रेरणा देता है और किसी पुष्प सुवास की तरह से रोज सुबह की तरह से अँधेरे और उजाले में अंतर को रेखांकित करता है .
हिंदी में लघुकथा को साहित्य की नयी विधा के रूप में देखा जाता है और पिछले कुछ दशकों के दौरान इसका काफी विकास हुआ है . लघुकथा लेखन में कथातत्वों का सार संयोजन इसे प्रभावी बनाता है और अंतर्वस्तु के रूप में अभिव्यक्ति की प्रधानता इस विधा में कथ्य को धार प्रदान करती है . अपने इस स्वरूप में लघुकथा सचमुच गागर में सागर को चरितार्थ करती है . इंदौर की सुपरीचित लेखिका रंजना फतेपुरकर के लघुकथा संग्रह ‘ बूँदों का उपहार ‘ को पढ़ना इस नजरिये से समीचीन है और इनमें संग्रहित लघुकथाएँ अपनी विषयवस्तु के अलावा भाषा , शिल्प और संवेदना में भी विशिष्ट हैं .
लेखिका ने अपनी इन लघुकथाओं में जीवन के इस यथार्थ को उसके तमाम प्रत्यक्ष – अप्रत्यक्ष रूपों के साथ देखा परखा है और ये लघुकथाएँ भाव और भाषा के अलावा जीवन को उसकी आभा और आत्मा की समस्त रंगतों में देखने – समझने की चेष्टा करती हैं . इसलिए अक्सर इनमें अनमोल संचयन के साथ जीवन के तत्वों की सघनता और इसके अनेकानेक घटनाक्रमों में निरंतर समाज के यथार्थ के संधान की चेष्टा समाहित दिखायी देती है . सचमुच प्रकृति और इसका रंगबिरंगा परिवेश हमारे जीवन संसार और इसकी आत्मा को निरंतर गढता रचता दिखायी देता है और इसी के जीवंत प्रांगण में मनुष्य के जीवन की तमाम घटनाएँ कार्य व्यापार अपने विविध रूपों में उजागर होते रोज हमारे सामने अनेक सवालों को लेकर भी उपस्थित होते हैं . अपनी लघुकथाओं में रंजना फतेपुरकर ने जीवन के लिए जरूरी शाश्वत महत्व की बातों को जानने समझने की कोशिश की है और मन प्राण वचन से इसके आत्मिक यथार्थ को अपनी इन लघुकथाओं में प्रकट किया है . उनकी लघुकथाएँ भाव विचार से परिपूर्ण हैं और इनमें जीवंत तत्व के रूप में मनुष्य के लिए आत्मिक तत्वों की सटीक पहचान के साथ इसके गहन विवेचन का उपाख्यान इनकी विषयवस्तु में प्रत्यक्षतया शामिल प्रतीत होता है . इसलिए स्वभावत : इनमें जीवन का सहज राग विराग समाया है और मन की सच्ची मोतियों की तरह से संसार का सुंदर यथार्थ सागर की लहरों में थिरकता मौजूद है . इसलिए इनको पढना अत्यंत सुखद है .
रंजना फतेपुरकर की लघुकथाओं को संवेदना और शिल्प की दृष्टि से दो कोटियों में बाँटा जा सकता है . इनमें पहले प्रकार की लघुकथाओं में वे रचनाएँ हैं जिनमें सांसारिक जीवन की गहन बातें जीवनमूल्यों आदर्शो के धरातल पर शाश्वत संदेश को अपने अर्थ संदर्भ में समेटती दिखायी देती हैं और दूसरी तरह की कुछ लघुकथाओं में वर्तमान जीवन का यथार्थ प्रकट हुआ है . इन लघुकथाओं को समाज – धर्म – संस्कृति और चिंतन का आइना भी कहा जा सकता है जिसमें मनुष्य और उसके जीवन की निरंतर सर्जना करने वाले तत्वों को रचनात्मक रूप में रेखांकित किया गया है . हमारी जीवन परंपरा में धर्म – अर्थ – काम और मोक्ष को जीवन का चार उद्देश्य बताया गया है जिसका समुचित निर्वहन मनुष्य का अभिष्ट बताया गया है . रंजना फतेपुरकर की इन लघुकथाओं के अर्थ को हम अपनी जीवन संस्कृति की इसी सामाजिक – आध्यात्मिक पृष्ठभूमि में जान समझ सकते हैं . हमारे देश की कथा परंपरा में धर्म – अधर्म , ज्ञान – अज्ञान , नीति – अनीति और हार – जीत के कथासूत्रों से समाज में मनुष्य के जीवन को देखने – समझने के उपक्रम से जुड़ी इन लघुकथाओं के प्रतिपाद्य में गहरे जीवन का समावेश है और समुद्र की विशालता आकाश की शांति में फैला उसका विस्तार हँसती बलखाती नदियाँ और प्रकृति के अन्य अवयव अपनी सांकतिक अर्थ योजना में हमारी जीवन यात्रा के पथ मार्ग गंतव्य पड़ाव और इसके तमाम रास्तों के मोड़ कोनों से अवगत कराते हैं . इनमें जीवन के सूक्ष्म और स्थूल इन सबकी विवेचना समाहित है . लेखिका ने अपने जीवन चिंतन के सुंदर पुष्प के रूप में इन लघुकथाओं को रचती प्रतीत होती है . इस संग्रह की कुछ लघुकथाएँ शिकायत , रिश्तों की कश्ती , मीठे वचन , अंतहीन आस और दर्पण के अलावा तितली के रंग की चर्चा समीचीन होगी . इसके अलावा पूजा , सृजन , सागर , नदी और चोंच भर साँस को भी कथा लेखिका ने अपनी लेखनी से कलात्मक रूप प्रदान किया है . इसके साथ फर्क , आँखों की नमी और लहरों की मुस्कुराहट की कथा योजना में वर्तमान जीवन की विडंबनाओं और इसके अंतर्विरोधों के बीच जीवन में प्रेम आस्था और संघर्ष के सहज प्रसंगों को अर्थ प्रदान किया गया है .
रंजना फतेपुरकर मूलत: कवयित्री हैं और उनके इस लघुकथा संग्रह की भाषा शैली पर भी इसका प्रभाव देखा जा सकता है . इस संग्रह की तमाम लघुकथाएँ अपने शीर्षक से लेकर अपने उद्देश्य में काव्यात्मक प्रतीत होती हैं और संगीत की एक अटूट लय इस संग्रह की तमाम लघुकथाओं में निरंतर गूँजती रहती है . प्रस्तुत पुस्तक को पढते हुए इसमें हम अपनी आत्मा की झंकार को सुनते हैं . . . ।

परिचय

नाम रंजना फतेपुरकर
जन्म 29 दिसंबर
शिक्षा एम ए हिंदी
प्रकाशित पुस्तकें 11
कहानी संग्रह “अनुराधा”,लघुकथा संग्रह”बूंदों का उपहार”,काव्य संग्रह “रेशमी अहसास”, “महकते गुलाब” अनेक साहित्यिक संस्थाओं से पुरस्कृत।
“लाल परी”नेशनल बुक ट्रस्ट ऑफ इंडिया से तीसरा संस्करण प्रकाशित।
सम्मान विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं से करीब 50 सम्मान
विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं से करीब 35 पुरस्कार।
देश विदेश की पत्र पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएं प्रकाशित।
दूरदर्शन,आकाशवाणी इंदौर,चायना रेडियो इंटरनेशनल,बीजिंग से रचनाएं प्रसारित।
रंजन कलश,इंदौर की अध्यक्ष