नीतीश सरकार ने राज्य में फिर 16 से 31 जुुलाई तक लागू किया फुल लॉकडाउन

बिहार में कोरोना की बढ़ती रफ्तार ने राज्य सरकार को चिन्ता में डाल दिया है, अब तो प्रतिदिन एक हजार से ज्यादा नए मरीज मिल रहे हैं, जिसके कारण राज्य सरकार ने बिहार में एक बार फिर सम्पूर्ण लॉक डाउन लगाने का आदेश जारी किया है। मुख्य सचिव कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक राज्य में 16 से 31 जुलाई तक पूर्ण लॉकडाउन किया गया है। गृह विभाग को अधिसूचना जारी करने का आदेश दे दिया गया है। अधिसूचना के मुताबिक 17 जुलाई से राज्य में पाबंदी लागू रहेगी।  और आदेश दे दिया गया है। बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने भी राज्य में पूर्ण लॉकडाउन की जानकारी दी है।

जुलाई में तेज है कोरोना की रफ्तार

कुछ दिनों में कोरोना के मामले राज्य स्तर पर तेजी से बढ़े हैं। जून महीने में जहां एक दिन में पॉजिटिव केस मिलने की रफ्तार दो से ढ़ाई सौ थी उसने जुलाई महीने में रफ्तार पकड़ ली। यह रफ्तार अब रोज 11 सौ से 12 सौ केस तक पहुंच चुकी है। मुख्यसचिव के निर्देश के बाद पहले भागलपुर इसके बाद 10 जुलाई से पटना में आंशिक लॉकडाउन लागू किया गया। अगले ही दिन करीब 15 जिलों में आंशिक लॉकडाउन लगा दिया गया।

अब लॉकडाउन में कठोर कदम उठाने का लिया है फैसला

अब सरकार ने लॉकडाउन को लेकर कठोर कदम उठाने का फैसला किया है। सरकारने  राज्य में पूर्ण लॉकडाउन के संबंध में मंथन कर फैसला लिया है।  पूरे प्रदेश में एक साथ लॉकडाउन लगाया गया है।

पहली बार बिहार सरकार ने 23 मार्च को ही कर दिया था लॉकडाउन

प्रदेश में पहली बार राज्य सरकार ने 23 मार्च की रात से लॉकडाउन प्रभावी किया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन किया। जिसकी मियाद दो बार बढ़ाई गई। देश के साथ-साथ बिहार में भी 31 मई तक लॉकडाउन रहा। इसके बाद एक जून से अनलॉक 1.0 और जुलाई से अनलॉक 2.0 प्रभावी किया गया। अनलॉक शुरू होने के साथ ही कोरोना के मामले तेजी से बढऩे लगे। जिसके बाद प्रदेश के कुछ जिलों में आंशिक लॉकडाउन किया गया। जिसे अब पूर्ण लॉकडाउन में बदलने की तैयारी है।

बिहार की राजनीति में अब कोरोना ने दहशत फैला दी है, राजद-जदयू के बाद अब कोरोना ने भाजपा नेताओं को अपनी चपेट में ले लिया है। बिहार विधानसभा चुनाव समय से कराने की वकालत कर रही भाजपा को उसकी तैयारी बैठक ने ही सांसत में डाल दिया है। हफ्ते  भर चली पार्टी की क्षेत्रीय बैठक की वजह से अधिसंख्य पार्टी पदाधिकारी कोरोना से संक्रमित पाए गए हैं।

भाजपा के बिहार प्रभारी भूपेंद्र यादव की अगुवाई में पिछले सप्ताह पटना में सात क्षेत्रीय बैठकें हुईं। उन बैठकों में प्रदेश और जिला स्तर के पार्टी पदाधिकारी सहित विधायक और पूर्व उम्मीदवार आदि शामिल हुए थे। उनमें से 137 दिग्गजों का सोमवार को सैंपल लिया गया था, जिनमें से 75 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। अब खलबली मची हुई है और पार्टी के प्रदेश कार्यालय को अगले 15 दिनों के लिए बंद कर दिया गया है।

इस साल नवंबर में मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल पूरा हो रहा है। उससे पहले यानी अक्टूबर-नवंबर में चुनाव की मियाद बनती है। उस मद्देनजर चुनाव आयोग की तैयारी भी चल रही, लेकिन राजद सहित तमाम विरोधी दल कोरोना संक्रमण का हवाला दे चुनाव को स्थगित करने का आग्रह कर रहे। इस संदर्भ में हाई कोर्ट में याचिका भी दायर हो चुकी है। दूसरी तरफ सत्तारूढ़ जदयू के साथ भाजपा समय से चुनाव की पक्षधर हैं। उसी मद्देनजर चुनावी तैयारी भी रफ्तार पकड़ रही थी कि कोरोना ने कहर ढा दिया।

फिलहाल पार्टी के प्रदेश संगठन महामंत्री नागेंद्र नाथ के अलावा प्रदेश महामंत्री देवेश कुमार, प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश वर्मा, राधा मोहन शर्मा, संगठन महामंत्री के निजी सचिव विकास कुमार, पूर्व उपाध्यक्ष अनिल शर्मा, मीडिया प्रभारी राजू झा  और राकेश सिंह, कार्यालय सचिव दिलीप मिश्रा आदि की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। वे सभी क्वारंटाइन हैं।

पिछले सप्ताह प्रदेश कार्यालय में आयोजित बैठक में पार्टी का एक ऐसा पदाधिकारी भी शामिल हुआ था, जो कोरोना से संक्रमित था। ऊपर से नीचे तक के तमाम पार्टी पदाधिकारी उसके संपर्क में आए और उसके बाद संक्रमण बढ़ता गया। अब पार्टी के कई पदाधिकारियों के स्वजन (पत्नी, बेटा-बेटी आदि) भी संक्रमण की चपेट में आ गए हैं। बता दें कि उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी के निजी सचिव के अलावा वित्त विभाग के भी कई कर्मियों की कोविड की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।

रघुवंश प्रसाद से राजनीति में कोराना की एंट्री

बिहार में अन्‍य कई दलों के नेता भी कोरोना पाजिटिव पाए गए हैं। पॉलिटिकल सर्किल में कोरोना की एंंट्री राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) के बड़े नेता डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह के संक्रमित होने के साथ हुई थी। इसके बाद पूर्व सांसद पुतुल कुमारी संक्रमित पाईं गईं। फिर जनता दल यूनाइटेड (JDU) के नेता भी संक्रमित मिले। अब तो सिलसिला ही चल पड़ा है। बीजेपी के 75 से अधिक नेताओं में मिला संक्रमण इसी की ताजा कड़ी है।