कवयित्री अल्पा योगेश महेता के साथ राजीव कुमार झा की बातचीत

गुजरात के राजकोट की कवयित्री अल्पा योगेश महेता साहित्य में अपने उपनाम एक एहसास से जानी जाती हैं और इन्होंने हिंदी , गुजराती के अलावा अँग्रेजी में काव्य लेखन किया है . पत्र – पत्रिकाओं और डीजिटल चैनलों पर इनकी कविताएँ प्रकाशित होती रही हैं और वर्ल्ड बुक आफ टैलेंट रिकार्डस के द्वारा इन्हें संवेदनशील कविता लेखन के लिए सर्वश्रेष्ठ कवयित्री का सम्मान भी प्रदान किया गया है . प्रस्तुत है इनसे राजीव कुमार झा की बातचीत .

प्रश्न – आपका काव्य लेखन से गहरा प्रेम है और आपकी पहचान एक संवेदनशील कवयित्री के रूप में है . अपने काव्य लेखन के बारे में बताएँ ?

उत्तर – सबसे पहले मेरी ज़ो रुचि है काव्य के प्रति उसके बारे में बताना चाहूँगी . मेरे पिता का काव्य से गहरा प्रेम था और मैं आज उन्हें एक कवि के रूप में ही याद करती हुँ लेकिन औपचारिक रूप में वे काव्य लेखन नहीं कर पाए . इस प्रकार वे कवि भी नहीं बन पाए . लेखन का संस्कार मुझे अपने पिता से ही मिला . काव्य लेखन से मेरा बाल्यावस्था से ही लगाव रहा और उम्र में बदलाव के साथ कविता लेखन में मेरी रुचि बढती गयी .

प्रश्न – आप गुजराती भाषी हिंदी कवयित्री हैं . हिंदी के अपने प्रिय रचनाकारों के बारे में बताइए ?

उत्तर – मैंने हिंदी के अनेक कवियों को पढा है . इनमें छायावाद के चार प्रमुख कवियों को मैं अपना आदर्श मानती हुँ . जयशंकर प्रसाद , सुमित्रानंदन पंत , महादेवी वर्मा और सूर्यकांत त्रिपाठी निराला हिंदी के ऐसे ही महान कवि हैं . इसके अलावा रामधारी सिंह दिनकर की रचनाओं से भी मेरा मन अनुप्राणित हुआ .

प्रश्न – हिंदी में लेखन के प्रति लगाव कैसे कायम हुआ ?

उत्तर –   मैं गुजरात की निवासी हूँ . मेरा शहर राजकोट है .यहाँ हिंदी भाषा के प्रति लोगों के मन में काफी सम्मान का भाव है . गुजरात में सारे लोग हिंदी पढते हैं . हिंदी के साहित्यकारों के प्रति गुजरात के लोगों के मन में काफी आदर भाव है . मेरी शिक्षा अँग्रेजी और हिंदी माध्यम से हुई है इसके बावजूद हिंदी के प्रति मेरे मन में सदैव आदर का भाव विद्यमान रहा . हिंदी के सहारे लोग एक – दूसरे के सहारे ज्यादा सरलता से विचार विमर्श करते हैं .

प्रश्न – अपने माता – पिता से आपको क्या प्रेरणा मिली ?

उत्तर – एक लेखिका के तौर पर अपने पिता से मैंने दूसरे लोगों के प्रति संवेदना के भाव को प्राप्त किया है . इसके अलावा अपनी माता से मैंने सदैव सच बोलना सीखा . दूसरी बात अपनी माँ से मैंने यह सीखी कि विपरीत परिस्थितियों में कभी जीवन में हार नहीं मानना चाहिए .मेरे ससुर शांतिभाई महेता गुजरात के पढरी जिला के सरपंच थे . उनसे भी दूसरों के दुख में अपने भीतर दया का भाव रखना मैंने सीखा .

प्रश्न – अपने काव्य लेखन को आप घर परिवार की परिस्थितियों से किस तरह से प्रभावित महसूस करती हैं ?

उत्तर – यद्यपि मुझे व्यक्तिगत तौर पर अपने जीवन में ज्यादा संघर्ष नहीं करना पड़ा क्योंकि मैं एक सुखी परिवार से हुँ लेकिन समाज में दूसरे लोगों के जीवन के संघर्ष को मैंने सदैव महसूस किया .अपनी कविताओं में मैंने लोगों की परेशानियों उनकी जिंदगी की कठिनाइयों को प्रकट किया है . इसे अपने लेखन के लिए मैं जरूरी मानती हुँ .

प्रश्न – गुजराती आपकी मातृभाषा है . इस भाषा का साहित्य आपको कितना प्रिय है ?

उत्तर – गुजराती कवि रमेश पारेख की कविताएँ मुझे बहुत प्रिय रही हैं . इनकी कविताओं में जीवन की रमणीयता और इसके दुख के साथ करुणा का सुंदर वर्णन हुआ है . मुझे उनकी कविता ‘ झरूखो ‘ काफी पसंद है . इसमें सुंदर कल्पना है और कविता में एक कन्या झरुखो यानी दरवाजे के पास खड़ी है . कवि ने इस कन्या के मनोभावों का लाजवाब वर्णन किया है . यह भावपूर्ण कविता सबके मन पर अमिट प्रभाव डालती है .

प्रश्न – साहित्य में वर्तमान काल काव्य लेखन आपको कैसा प्रतीत होता है ?

उत्तर – आज के काव्य लेखन में मन के भावों की गहराई अब पहले की तरह दिखायी नहीं देती . अब काव्य लेखन में कवि के भीतर जीवन की प्रेरणा की कमी दिखायी देती है और इसी अनुरूप कविता में शब्दों का प्रयोग भी बाधित और संकुल होता जा रहा है . आजकल काफी लोग लिख रहे हैं लेकिन काव्य लेखन कोई खास प्रभाव कायम नहीं कर पा रहा है .

प्रश्न – गुजरात के समाज और इसकी संस्कृति को आप किस तरह विशिष्ट महसूस करती हैं ?

उत्तर – गुजरात के लोगों के ह्रदय में यहाँ दूसरे प्रांतों से आने वाले लोगों के प्रति गहरा प्रेम बसा है . यहाँ अतिथि सत्कार की एक परंपरा आज भी है .

प्रश्न – गुजरात में महिलाओं की जीवन संस्कृति के बारे में बताएँ ?

उत्तर – गुजरात एक परंपरागत संस्कृति का प्रांत है और आज भी यहाँ महिलाएँ ज्यादातर घरों में जीवन जीती दिखायी देती हैं . वे घर के भीतर इस जीवन को आसानी से स्वीकार कर लेती हैं . यद्यपि अब गुजरात की नारियाँ भी अपने जीवन में कुछ नया करना चाहती हैं लेकिन वे शादी घर गृहस्थी में बँधकर ज्यादातर अपने जीवन के इन सपनों से समझौता कर लेती हैं .

प्रश्न – महिलाओं के जीवन में आने वाले बदलावों के बारे में आपका क्या नजरिया है ?

उत्तर – आज की महिलाएँ मुझे दोराहे पर खड़ी दिखायी देती हैं . शहरों में महिलाओं के लिए भी नौकरी करना उनकी जरूरत है और इसके साथ घर की जवाबदेही में ही सिमटकर रहना उनकी पुरानी छवि है इसलिए वे एक असमंजस में मुझे दोराहे पर खड़ी नजर आती हैं . समाज में महिलाओं की मनोवेदना को समझना आसान नहीं है और यह संवेदना का बड़ा प्रसंग है .

प्रश्न – कविता लेखन के अलावा आपकी अभिरुचि से जुड़े अन्य विषय क्या हैं ?

उत्तर – साहित्य के अलावा गायन में भी मेरी रुचि है . पुरानी फिल्मों को देखने का शौक मुझे खूब रहा है . इन फिल्मों के गाने भी मैं सुनती हुँ . मुझे गुलाम अली और मेंहदी हसन की गजलें सुनना भी पसंद है .गुरुदत्त और दिलीप कुमार मेरे पसंदीदा अभिनेता हैं . इसके अलावा सैर सपाटे का शौक भी मुझे रहा है . मैंने आस्ट्रेलिया , न्यूजीलैंड और दुब ई की यात्रा भी की है . अपने देश में मेरा अक्सर मुंब ई आना जाना होता है . मेरी बेटी वहाँ आर्किटेक्चर की पढायी कर रही है .

प्रश्न – अपने मन की ऐसी कोई खास बात जिसे आप बताना चाहती हों ?

उत्तर – मैं शुरू से अपने पिता से काफी प्रभावित रही हुँ वे एक व्यवसायी थे और उन्होंने मुझे श्रेष्ठ जीवन मूल्यों में विश्वास करना सिखाया ।

प्रश्न – समाज में आदमी परंपरागत जीवन मूल्यों से अब कितना प्रभावित दिखायी देता है ?

उत्तर – आजकल समाज में लोग जीवन के तमाम स्वस्थ मूल्यों से दूर या विरक्त होते प्रतीत होते हैं . जीवन में भागदौड़ की बातें अब प्रमुख हो गयी हैं और जीवन की छोटी – छोटी खुशियों से आदमी के जीवन में जो आनंद था वह खत्म हो गया है . समाज में आदमी काफी कुछ पाने के बाद भी असंतुष्ट दिखायी देता है .

प्रश्न – इस परिस्थिति से उबरने के लिए मनुष्य को क्या करना चाहिए ?

उत्तर – मनुष्य अपने मन की शांति को पाने के लिए फिर से कोशिश करे . इसके लिए उसे अपनी ख्वाहिशों को कम करना चाहिए . सबको जीवन में योग को धारण करना चाहिए .

प्रश्न – जीवन में आप सबसे प्रिय किसे मानती हैं ?

उत्तर – मुझे अपनी बेटी बहुत प्रिय है . बेटी सचमुच बेटों से भी बढ़कर होती है .

प्रश्न – लेखन करते कैसा महसूस करती हैं ?

उत्तर – जीवन में खुद को बहुत सफल महसूस करती हुँ . काव्य लेखन से मुझे निरंतर ऊर्जा मिलती है . अपनी रचनाओं को लोगों के पास देखकर खुशी होती है .

प्रश्न – कविता के अलावा अन्य विधाओं में अपने लेखन के बारे में बताएँ ?

उत्तर – कविता लेखन के अलावा मैंने कहानी लेखन भी किया है . अपनी कहानियों में आज की जिंदगी के प्रसंगों को मैंने प्रस्तुत किया है . हाल में मैंने एक कहानी लिखी है और इसमें एक लड़की आनलाइन प्रेम में संलग्न दिखायी देती है . प्रेम एक सच्चा भाव है . इस कहानी में जीवन के बदलते संदर्भों में प्रेम के बारे में मैंने यह कहने की कोशिश की है .

प्रश्न – अपने देश की संस्कृति से अपने लगाव को किन शब्दों में प्रकट करना चाहेंगी .

उत्तर – भारत की संस्कृति और इसकी आत्मीयता मुझे बहुत अच्छी लगती है . मैं जब भी विदेश जाती हुँ और वापस लौटकर जब अपने देश आती हुँ तो यहाँ की धरती पर कदम रखना मुझे खूब आह्लादित करता है . दूसरे देश जब जाती हुँ तो वहाँ अपने देश से भौगोलिक दूरी को महसूस करती हुँ . मेरा देश मेरा सर्वस्व है .

प्रश्न – कोरोना का संकट और लाक डाउन को जीवन के कैसे अनुभव के तौर पर देखती हैं ?

उत्तर – लाक डाउन का संकट अचानक आया लेकिन इसने सारे लोगों को कुटुंब की तरह से एक – दृसरे के करीब आने का मौका दिया . इसे हमें सकारात्मक रूप से देखना चाहिए . धरती पर संकटों का आना जाना एक नियम है . कोरोना भी एक ऐसा ही संकट है . यह देशव्यापी है .

प्रश्न – आप जैन मतावलंबी हैं . मानव जाति के प्रति इस धर्म का क्या संदेश है ?

 उत्तर – जैन धर्म के सदियों पुराने संदेश आज भी प्रासंगिक हैं . आज कोरोना के विषाणु से बचाव के लिये मास्क लगाने की जो बातें कही जा रही हैं उसके बारे में इस धर्म में काफी पहले बताया गया है . इस धर्म के अनुयायियों में मुँहपति के रूप में कपड़ा बाँधने का रिवाज रहा . कोरोना संकट के इस काल में सारी दुनिया इसका अनुसरण कर रही है . जैन धर्म में बीमारी के वाहक विषाणुओं से बचने के लिए पानी को गर्म करके पीने के लिए भी कहा गया है . इसके अलावा आज शाकाहार के प्रति भी सारी दुनिया में लोगों का झुकाव बढ़ रहा है . ये सारी बातें जैन धर्म में पहले से कही गयी हैं . अहिंसा जैन धर्म का मूल भाव है . इस धर्म में प्रचलित सारी बातें वैज्ञानिक कसौटी पर प्रमाणित हो चुकी हैं . जैन धर्म में शाम सात बजे के बाद भोजनादि की मनाही है . देर रात तक जगना खाना – पीना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है . कोरोना से बचाव में अब ये बातें फिर बतायी गयी हैं . कोरोना में भीड़भाड़ से बचने के लिए कहा जा रहा है और जैन धर्म में ये सारी बातें मोटर गाड़ियों की आवाजाही से बचाव की कही गयी हैं .

प्रश्न – डीजिटल मीडिया साहित्य को किस तरह प्रभावित कर रहा है ?

उत्तर – डीजिटल मीडिया से किताबों को पढ़ने का नया तरीका सामने आया . इससे किताबों को पढ़ने की प्रवृत्ति प्रभावित हुई है . डीजिटल मीडिया से काफी कम समय में लोग प्रसिद्धि पा रहे हैं . यह अच्छी बात है लेकिन यह भी जरूरी है कि कविता की मौलिकता कायम रहे और अनुकरण से लोग खुद को दूर न ले जाएँ .