मुकेश : हिंदी सिनेमा के पार्श्व गायक

राजीव कुमार झा
हिंदी सिनेमा के रजतपट पर मुकेश के गाये सुंदर गीत सदा यादगार बने रहेंगे . राजकपूर की फिल्मों में गायन से उन्हें गायक के रूप में अविस्मरणीय पहचान मिली और इस प्रसंग में आवारा के अलावा मेरा नाम जोकर और तीसरी कसम में उनके गीत आज भी सभी आयु वर्ग के दर्शकों को पसंद आते है . मुकेश ने मिलन फिल्म में सुनील दत्त के लिए भी गाया और कभी कभी में अमिताभ बच्चन की छवि को रोमांटिक स्वर से नया अंदाज दिया . मुकेश का गाया गीत छोड़ो कल की बातें कल की बात पुरानी 15 अगस्त और गणतंत्र दिवस के दिन सारे देश की फिजां में गूँजता है . वे रोमांटिक गायक माने जाते हैं लेकिन आवारा के गीतों में उनके गाये गीत मानव मन की घनीभूत पीड़ा को प्रकट करते है . मुकेश के स्वर में एक दर्द समाया था और उनका गाये अनेक सिने गीत उनकी इस विशिष्टता को प्रकट करते हैं । मुकेश ने तुलसीदास के रामचरितमानस को भी गाया . उनका सुंदरकांड का पाठ आज भी सबको सुनना अच्छा लगता है . तीसरी कसम के गीत बिहार की लोक शैली में गाना आसान नहीं था लेकिन इस फिल्म के सारे गीतों की लयबद्ध प्रस्तुति उनके गायन की विशिष्टता को प्रकट करते हैं . तीसरी कसम की शुरुआत हीरामन गाड़ीवान की भूमिका में मुकेश के स्वर में सजन रे झूठ मत बोलो खुदा के पास जाना है इस गीत को श्वेत श्याम पर्दे पर सुनकर दर्शक झूम उठते हैं . मनोज कुमार की फिल्मों में भी मुकेश के गीत सहजता से सुनायी देते हैं और सचमुच उनके गीतों को सुनते हुए मन को यह कहना लाजिमी प्रतीत होता है कि जिंदगी और कुछ भी नहीं तेरी मेरी कहानी है । सिनेमा को कथा प्रधान कला कहा जाता है और इसमें काव्य गीत संगीत के रूप में समाहित होकर दृश्य कला को श्रव्य तत्वों के संयोजन बनाता है . हिंदी सिनेमा में मुकेश ने सभी गायिकाओं के साथ गाया और सिनेमा को संवेदना का स्वर दिया . मुकेश की गायन शैली का गहरा प्रभाव मन्ना डे के अलावा किशोर कुमार और शैलेन्द्र सिंह के फिल्म गीत गायन पर दिखायी देता है . भवभूति ने कहा है एको रस : करुण रस : मुकेश के गायन में इसका समावेश है