पार्किंग माफियाओं की मनमानी, देना होगा लॉकडाउन का किराया

नई दिल्ली। पार्किंग माफियाओं की मनमानी और उन्हें लॉकडाउन के दौरान की फीस में छूट देने की अधिकारियों की सिफारिश का मामला स्थायी समिति की बैठक में जोरशोर से उछला। पूर्वी दिल्ली नगर निगम महापौर ने कहा कि एक तरफ तो निगम ने विकास संबंधी खर्च में 75 फीसद की कटौती कर दी है वहीं जहां से आय होनी है उन्हें लूटने की छूट दे रखी है। डिप्टी चेयरमैन दीपक मल्होत्रा ने कहा कि यह निगम के साथ कैसी साजिश है, पूरे लॉकडाउन में लगभग सभी पार्किंग भरी हुई रहीं फिर भी छूट की पैरोकारी की जा रही है।

स्थायी समिति चेयरमैन सत्यपाल सिंह ने कहा कि किसी भी पार्किंग ठेकेदार को कोई छूट नहीं दी जाएगी, अपवाद के मामले अलग होंगे। मल्होत्रा ने यूनिपोल फर्मो को भी किसी तरह की छूट न देने की मांग की। बैठक में पूर्व महापौर बिपिन बिहारी ¨ ने कई पार्किंग स्थलों का उदाहरण देते हुए ठेकेदार को जितनी जगह दी जा रही है उसकी तुलना में दोगुनी जगह पर वह काम कर रहे हैं। जिससे निगम को चूना लगाया जा रहा है।

दूसरी ओर निगम ने इस आधार पर विकास के 75 फीसद काम को रोक दिया गया कि आमदनी नहीं हो रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आमदनी के लिए निगम प्रयास ही नहीं कर रहा तो कहां से राजस्व आएगा। उन्होंने कहा कि गीता कॉलोनी श्मशान घाट के पास निगम ने 2000 वर्गमीटर जगह पार्किंग के लिए दी हुई है। लेकिन ठेकेदार 4000 वर्गमीटर में पार्किंग चला रहा है। यह स्थिति अधिकतर जगहों पर है।

स्थायी समिति चेयरमैन सत्यपाल सिंह ने कहा कि सदस्यों की बात पूरी तरह से सही है। उन्होंने खुद पार्किंग स्थलों की स्थिति देखी हुई है। यहां जबरदस्त गोरखधंधा चल रहा है। अधिकारी आम जरूरत के खर्च में कटौती कर रहे हैं लेकिन वह निगम की आमदनी नहीं बढ़ाना चाहते। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लाकडॉउन के समय का पार्किंग का कोई किराया माफ नहीं किया जाएगा। निगम सभी पार्किंग ठेकेदारों से मासिक किराया जल्द वसूल करे। अपवाद स्वरूप अगर किसी पार्किंग में गाड़ियां बिल्कुल भी पार्क नहीं हुई हैं तो उस पर अलग से विचार किया जा सकता है।

उन्होंने कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए खरीद को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि एक तरफ अधिकारी यह कह रहे हैं कि उन्हें अधिकतर चीजें दान में मिली हैं वहीं दूसरी ओर इसे निगम के खर्चे में भी जोड़ा जा रहा है। समिति के डिप्टी चेयरमैन दीपक मल्होत्रा ने कहा कि पूरे लॉकडाउन में उनके आसपास की पार्किंग भरी रही है। लोगों ने पूरे पैसे दिए हैं फिर भी ठेकेदार शुल्क में छूट की मांग कर रहे हैं। इसी तरह सड़क किनारे यूनिपोल पर लगाए जाने वाले विज्ञापन साइट पर भी विज्ञापन लगे रहे हैं लेकिन छूट मांग रहे हैं। पार्षदों ने कहा कि पार्किंग से लेकर यूनिपोल में इतनी गड़बड़ी चल रही है लेकिन अधिकारी खामोश बैठे हैं, निश्चित रूप से इसके पीछे मंशा ठीक तो नहीं ही हो सकती है।