एसडीएमसी और पुलिस प्रशासन की मदद से हो रहे है अवैध निर्माण

कुंदन

नई दिल्ली । दक्षिण दिल्ली नगर निगम ने भवन निर्माण के लिए कुछ नियम लागू किए हुए हैं ,जैसे बिल्डिंग में लिफ्ट को ना लगाना, कार पार्किंग ना होना, बिना नक्शा पास कराए बिल्डिंग अमान्य, भवन मजबूती के लिए तराई जब तक काई न जमे आदि परंतु वार्ड नंबर 94s के विश्वकर्मा कॉलोनी में आज भी अवैध रूप से बिना नक्शा पास कराए और बिना पार्किंग, साथ ही नगर निगम के नियमों का उल्लंघन कर अवैध निर्माण किए जा रहे हैं बिल्डरों के द्वारा जो भवन निर्माण हो रहे हैं उनके समय सीमा बहुत ही कम है आज पैसा दो और 3 महीने में मकान लो, क्योंकि मकान में या भवन निर्माण में अच्छी quality material ठीक नहीं लगाया जाता|

जहां तक निगम का कहना है विभाग द्वारा अधिसूचना जारी है की “जब तक दीवारों में काई जम ना जाए तब तक दीवारों की तराई होना अनिवार्य है परंतु यह बिल्डर मकानों को 5 फ्लोर तक बनाते हैं और समय सीमा लगभग 3 महीने। दक्षिण दिल्ली नगर निगम ने बिल्डिंग में लिफ्ट को ना लगाना, कार पार्किंग ना होना, बिना नक्शा पास कराए बिल्डिंग अमान्य |

यह समझ से परे है कि तराई के लिए पानी कहां से आए क्योंकि भवन निर्माण के लिए पानी दिल्ली जल बोर्ड देता ही नहीं है पानी कैसे आया होगा और तराई कैसे की होगी ।

एक ओर दक्षिण दिल्ली नगर निगम अनजान बना हुआ है तो वही बिल्डर यहा अपना जाल फैला रहे हैं। दक्षिण दिल्ली नगर निगम ने 105 गज के पर भवन के नक्शे की शर्त हटा दी है लेकिन किसी एक परिवार के लिए भवन के लिए ही यह स्कीम लागू है। अगर 50-100 गज  के प्लॉट पर बिल्डर पांच मंजिला बिल्डिंग खड़ी कर देता है तो यह नियम कानून के मुँह पर तमाचा मारने जैसा ही होगा ।

अनियमित कालोनियो के नियमन का मुद्धा जहांअभी संशय के बीच है अवैध निर्माण के बढते कदम निगम ओर पुलिस प्रशासन की पोल खोलने के लिए काफी है ।

एकत्रित सूचना के अनुसार पुल प्रहलापुर क्षेत्र की विश्वकर्मा कॉलोनी मे धड़ल्ले से अवैध निर्माण जारी है। बताते चले कि नये भवन के लिए वर्षा जल संचयन तकनीक और पार्किंग बनाने की शर्त अनिवार्य | यहा भवन बहुमंजिला बन रहे हैं लेकिन विश्वकर्मा कालोनी मे किसी मानक को पूरा करने के लिए कोई प्रयास नही हो रहे हैं ।

दक्षिण दिल्ली नगर निगम के भवन विभाग के अभियाताओ की मिलीभगत से  कई मंजिला फ्लैट बनाकर बेचने का कारोबार शुरू किया हुआ है जिसे स्थानीय पुलिस का पूरा संरक्षण प्राप्त हैयहां पर कई भवनों में दरार भी आ चुकी है क्योंकि यहां पर बेसमेंट बनाने का कार्य जोरों पर चलता है ।

दक्षिण दिल्ली क्षेत्र मे

अवैध निर्माण का एक सच यह भी है कि दक्षिण दिल्ली क्षेत्र मे एरिया जूनियर इंजीनियर ने एक भी ऐसा कोई SIGN BOARD एरिया मे नही लगवाया है कि अवैध निर्माण की शिकायत कहा की जा सकती है । जब कोई व्यक्ति मकान बनाने लगता है तब जूनियर इंजीनियर की टीम अपना हिस्सा लेने पहुंच जाती है ओर कमोबेश यही हाल पुलिस का है । जिसकी सुस्ती दक्षिण दिल्लीे से अवैध निर्माण को बाढ आई हुई है ।