अभिनेता संजय दत्त की जल्द रिहाई पर राजीव गांधी हत्याकांड का दोषी पहुंचा हाईकोर्ट

मुंबई। राजीव हत्याकांड में दोषी एक कैदी ने बांबे हाईकोर्ट में अभिनेता संजय दत्त की जल्द रिहाई से संबंधित ब्योरा मांगा है। 1993 के मुंबई बम धमाके के मामले में दत्त को सजा पूरी होने से पहले रिहा किया गया था। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या का दोषी एजी पेरारिवलन ने 19 साल की उम्र में 9 वोल्ट की दो बैटरी मुहैया कराई थी। इस बैटरी का इस्तेमाल इस बम धमाके में किया गया था। इसी अपराध के लिए अब पेरारिवलन उम्रकैद की सजा काट रहा है।  वह चेन्नई की पुझल सेंट्रल जेल में बंद है।

पेरारिवलन उम्रकैद की सजा काट रहे है

29 सालों से सलाखों के पीछे रह रहे इस व्यक्ति ने पिछले सप्ताह बांबे हाईकोर्ट में अर्जी दी क्योंकि वह सूचना के अधिकार के तहत अपने सवालों का महाराष्ट्र जेल विभाग से जवाब हासिल करने में असफल रहा था। संजय दत्त को 2006-2007 में विशेष अदालत ने हथियार कानून के तहत दोषी ठहराया था उन्हें छह साल की कैद की सजा सुनायी थी। बाद में हाईकोर्ट ने इस फैसले पर मुहर लगायी थी लेकिन कारावास की अवधि घटाकर पांच साल कर दी थी। मई 2013 में संजय दत्त ने यरवदा जेल में अपनी सजा पूरी करने के लिए आत्मसमर्पण किया था। सजा के दौरान उन्हें कई मौको पर छुट्टी और पेरौल दिया गया तथा 25 फरवरी, 2016 को उन्हें 256 दिन पहले रिहा कर दिया गया था।

अगले सप्ताह पेरारिवलन की अर्जी पर सुनवाई होने की संभावना

पेरारिवलन की याचिका के अनुसार उसने मार्च 2016 में यरवदा जेल को आरटीआइ आवेदन देकर यह जानना चाहा कि संजय दत्त की समयपूर्व रिहाई से पहले केंद्र और राज्य सरकार की राय ली गयी थी या नहीं। जवाब नहीं मिलने पर वह अपीलीय प्राधिकरण के पास पहुंचा जिसने यह कहते हुए उसे सूचना देने से इनकार कर दिया कि इसका संबंध तीसरे व्यक्ति से है। फिर वह राज्य सूचना आयोग पहुंचा जिसने अपर्याप्त और अस्पष्ट आदेश जारी किया। तब वह हाईकोर्ट की शरण में आया है। अगले सप्ताह पेरारिवलन की अर्जी पर सुनवाई होने की संभावना है।

केंद्र से पूछा, क्या राजीव हत्याकांड के दोषी कर सकते हैं वीडियो कॉल 

मद्रास हाईकोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार से पूछा है कि क्या राजीव गांधी हत्याकांड के दो दोषियों नलिनी और उसके पति मुरुगन को जेल से कम से कम एक वीडियो कॉल करने की इजाजत मिल सकती है। यह दंपती जेल से ही श्रीलंका में अपनी विधवा मां से बात करना चाहते हैं। जस्टिस एन.किरुबकरन और जस्टिस वीएम वेलुमणि ने केंद्र से नलिनी की मां एस पदमा की याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। वह चाहती है कि उसकी बेटी और मुरुगन श्रीलंका में अपनी सास और लंदन में अपनी ननद से हर दिन दस मिनट वीडियो कॉल कर सके।