सारे संसार के लिए प्रासंगिक है अन्तरराष्ट्रीय मित्रता दिवस का संदेश

राजीव कुमार झा

सारी दुनिया में 30 जुलाई के दिन अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है . संसार के सभी देशों के बीच मित्रतापूर्ण संबंध जरूरी है और दुनिया में विभिन्न देशों की आपसी मित्रता से ही धरती पर खुशहाली आते है और विभिन्न देशों की आपसी दुश्मनी से दुनिया में अशांति फैल जाती है और कभी कभार युद्ध के रूप में इसके भयावह परिणाम भी सामने आते हैं . संयुक्त राष्ट्र विश्व शांति और विकास की संस्था है . यह संसार के तमाम देशों के बीच उनकी मित्रता प्रेम और आपसी भाईचारे के विकास के लिए कार्य करती है . इस दिन यह विश्व संस्था सारे संसार के देशों को अपने पड़ोसी देशों के अलावा दूर सुदृर के देशों से मित्रतापूर्ण संबंधों के विकास के लिए प्रोत्साहित करती है . संसार में शीत युद्ध की समाप्ति के बाद वैश्विक तनाव का माहौल अब समाप्त हो गया है . इसके बावजूद संसार के अनेक देशों में सीमा विवाद के अलावा अन्य मुद्दों को लेकर आपसी विवाद आज भी कायम हैं . हाल में भारत – चीन के बीच उभरे सीमा विवाद को इस परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है . पाकिस्तान के साथ भी सीमा विवाद को लेकर उससे भारत के तनावपूर्ण संबंध जग जाहिर हैं . दुनिया के विभिन्न देशों के बीच आपसी शत्रुता चिंताजनक है और इससे सैन्यकरण को बढावा मिलता है . युद्ध मानवता के प्रति अपराध है और आक्रमणकारी देशों के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र संघ को कड़ी कारवाई करनी चाहिए . दुनिया में चीन – पाकिस्तान ये दोनों आक्रमणकारी देश के रूप में प्रसिद्ध हैं . स्वतंत्रता के बाद भारत ने पंचशील की नीति का अनुसरण किया लेकिन चीन ने शांति समझौते के बावजूद भारत पर 1962 में अकारण भीषण आक्रमण किया और भारत के विस्तृत भूभाग पर कब्जा जमा लिया . चीन की तरह पाकिस्तान भी प्रसारवाद का समर्थक देश है . देश की स्वतंत्रता और इसके बँटवारे के बाद से पाकिस्तान सैनिक शक्ति के बूते कश्मीर पर कब्जा करने की फिराक में रहा है . दुनिया के सारे देशों को मित्रता का आदर्श स्वीकार करना चाहिए और क्षुद्र स्वार्थ की भावना से खुद को दूर ले जाना चाहिए . भारत की संस्कृति प्राचीन काल से संसार को वसुधैव कुटुंबकम का संदेश देती रही है . संसार में सभी देशों को ज्ञान विज्ञान के अलावा अन्य क्षेत्रों में आपसी सहयोग को कायम करके विकास और उन्नति के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए ।