राजनैतिक रसूख का धौंस दिखाकर भी अवैध निर्माण को देते हैं बढ़ावा

दक्षिणी दिल्ली के ओखला औधोगिक में खुलेआम पेड़ों को काटकर बनाई जा रही हैं इमारतें

अखिलेश कुमार ‘अखिल’ I
नई दिल्ली I दक्षिणी दिल्ली के ओखला औधोगिक में खुलेआम पेड़ों को काटकर बड़ी-बड़ी इमारतें बनाई जा रही हैं, यहाँ तक कि इमारतें बनाने के लिए दिए गए तय मानकों का पालन भी नहीं किया जाता, बता दें कि बिना अनुमति के ही बेसमेंट खोदना, पर्यावरण प्रदूषण, लेआउट प्लान को डिस्प्ले नहीं करना, सैंक्शन प्लान का डिस्प्ले नहीं करना, वन विभाग से बिना अनुमति पेड़ों का काटना, यहाँ तक की इनके पास अग्निशमन विभाग अनापत्ति प्रमाण पत्र तक नहीं होता है I
सूत्रों के हवाले से खबर है कि ओखला औधोगिक क्षेत्र में डीडीए के अलॉटेड शेड्स को तोड़कर फिर से बेसमेंट खोदकर बड़ी इमारतें बनाने का जोरों पर चल रहा है, बीते कुछ दिन पहले भी डीडीए शेड्स को तोड़कर बेसमेंट खोद दिया गया था जिकी वजह से बेसमेंट के साथ की तीन इमारतें और गिर गयी थी गनीमत रही कि कोई जान नहीं गयी, स्थानीय लोगों ने बताया कि ओखला में बिल्डरों का राजनैतिक रसूख है और वो अपनी ऊपर तक पहुंच का धौंस दिखाकर अवैध निर्माण धड़ल्ले से करते हैं I

मिली जानकारी के मुताबिक बिल्डिंग बायलॉज़ में लिखा हैं कि कोई भी पहले के बिना अनुमति के परिवर्तन नहीं करेगा या ऐसा नहीं करवाएगा ऐसे प्रत्येक भवन के लिए एम.सी.डी. से अलग भवन अनुज्ञा प्राप्त करना। यह हित में है जनता से भवन निर्माण योजनाओं को स्वीकृत कराने के लिए यह सुनिश्चित करने के लिए कि भवन का निर्माण किया गया है पर्याप्त संरचनात्मक ताकत और प्रकाश, वेंटिलेशन, स्वच्छ परिस्थितियों और के लिए प्रावधान है मास्टर प्लान और ज़ोनिंग विनियमों के प्रावधानों के अनुरूप बिना उठाए गए निर्माण डी.एम.सी की धारा 343 और 344 के तहत विध्वंस के लिए स्वीकृति उत्तरदायी है। अधिनियम और मालिक/निर्माता अधिनियम की धारा 466ए के साथ पठित धारा 345ए के तहत नियमित अभियोजन का भी सामना कर सकते हैं। डीएमसी अधिनियम की धारा 346 के तहत पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त करना भी अनिवार्य है जिस पर किसी भी व्यक्ति को कब्जा करने की अनुमति नहीं है या ऐसी किसी भी इमारत पर कब्जा करने की अनुमति नहीं है या अनुमति प्राप्त होने तक ऐसे किसी भी कार्य से प्रभावित किसी भवन या उसके भाग का उपयोग किया जा सकता है I