कवि रामकुमार पटेल शांत से राजीव कुमार झा की बातचीत…
इंटरव्यू
प्रश्न:कविता लेखन की ओर कब और कैसे रुझान क़ायम हुआ?
उत्तर:मुझे किसी के जीवन के प्रसंगों ने लेखन की ओर उन्मुख नहीं किया। मीडिल स्कूल से निकलने के बाद मैंने साहित्य पढ़ना शुरू कर दिया था। कविता और शायरी उससे पहले भी मुझे प्रभावित करती थीं,आज भी करती हैं।और मुझे साहित्य के लेखकों की प्रकाशित किताबों ने ही लेखन की ओर उन्मुख किया है।
प्रश्न:अपने प्रिय लेखकों के बारे में बताएं
उत्तर:मेरे प्रिय लेखकों की सूची बहुत लंबी है। सबकी जानकारी देना तो मुश्किल है मेरे लिए।सबका नाम लेना भी संभव नहीं है लेकिन यहां कुछ का उल्लेख ज़रूर करूंगा। विश्व कवि रवींद्रनाथ टैगोर के अलावा सुभद्रा कुमारी चौहान, मुंशी प्रेमचंद, सुमित्रानंदन पंत, रामधारी सिंह दिनकर, मैथिली शरण गुप्त, हरिवंशराय बच्चन, रामकुमार वर्मा, दुष्यंत कुमार, अदम गोंडवी, विज्ञान व्रत, शहरयार, बशीर बद्र, वसीम बरेलवी के अलावा और अन्य हैं। मेरे विचार से उल्लेखित लेखकों के बारे में आप भी परिचित होंगे।
प्रश्न: अपने बचपन माता – पिता
घर परिवार के बारे में बताइए?
उत्तर:गाँव में छोटे किसान के घर में मेरा जन्म हुआ। पढ़ाई से अधिक रुचि चित्रकारी और अन्य कलाओं में थी । पिताजी किसान हैं, माता और पत्नी गृहणी हैं। दो बच्चे हैं…एक लड़की एक लड़का…दोनों अभी पढ़ाई कर रहे हैं ।
बचपन से अभावों में पला बढ़ा हूँ। शारीरिक और आर्थिक समस्याएँ घेरे रहती थीं। शारीरिक कमज़ोरी और कमज़ोर स्मृति की वजह से इंटरमीडिएट से ज़्यादा पढ़ाई संभव नहीं हो पाया।
मैंने लेखन की शुरूआत 1993 से कर दी थी। आठवीं कक्षा में था तो मेरी छोटी बहन ने अखबार में छपी एक देशभक्ति कविता लाकर दी थी, उसी कविता में मैंने और दो पंक्ति जोड़ी थी। इस मेरे लेखन की शुरूआत हुई।
प्रश्न- आज के दौर का साहित्यिक माहौल कैसा प्रतीत हो रहा है?
उत्तर : आज के दौर में साहित्य के हर विधा में रचनाएँ ख़ूब रची जा रही हैं। मंचों पर पढ़ी जा रही हैं। सोशल मीडिया के आगमन से पत्रिकाओं की संख्या बहुत कम हुई। उसकी जगह पर हर शहर में प्रकाशन संस्थान खुल गये हैं और भारी तादाद में किताबें प्रकाशित हो रही हैं। भले ही किताबों की ख़रीदी नहीं के बराबर है लेकिन लेखकों की तादाद बहुत बढ़ी है।
अब तक के साहित्यिक सफ़र में कहीं – कहीं पर बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। कहीं – कहीं पर निराशाजनक है। मेरी आधी रचनाएं बहुत अच्छी हैं तो कुछ अन्य लेखकों की नज़र में साधारण हैं – जिससे मैं ख़ुद भी ज़्यादा संतुष्ट नहीं हूँ। लेकिन पहले से बेहतर करने की कोशिश जारी है।
प्रश्न:पाठकों को क्या संदेश देना चाहते हैं
उत्तर:अभी पाठकों को संदेश तो नहीं दे सकता हूँ। सिर्फ़ निवेदन कर सकता हूँ कि – साहित्य को आपके सहयोग की बहुत ज़रूरत है। आपसे जितना हो सके सहयोग दीजिए। आपके सहयोग के बिन साहित्य समृद्ध नहीं हो सकता है।



