कैमरे पर रिश्वत लेते पकड़ी गई थीं काकोली घोष : कीर्ति

-अन्य भ्रष्ट नेताओं की भी जानकारी का दावा

भारत पोस्ट संवाददाता
नई दिल्ली। टीएमसी सांसद कीर्ति आज़ाद ने काकोली घोष दस्तीदार पर कैमरे पर 5 लाख रुपये की रिश्वत लेने का गंभीर आरोप लगाया है और उनकी ईमानदारी पर सवाल उठाए हैं। आज़ाद ने दावा किया है कि उनके पास अन्य भ्रष्ट नेताओं की भी जानकारी है और वह उन्हें 10 लाख रुपये लेते रंगे हाथों पकड़कर बेनकाब करने का इरादा रखते हैं। यह बयान टीएमसी में आंतरिक भ्रष्टाचार और राजनीतिक आरोपों को दर्शाता है।
तृणमूल कांग्रेस के सांसद कीर्ति आज़ाद ने शुक्रवार को पार्टी के बागी नेताओं पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि काकोली घोष दस्तीदार कैमरे पर 5 लाख रुपये लेते हुए पकड़ी गई थीं। उन्होंने टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी की आलोचना करने को लेकर काकोली घोष दस्तीदार की ईमानदारी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनके पास इसमें शामिल दूसरे लोगों के बारे में भी जानकारी है और वे पैसे मिलने पर उनका पर्दाफ़ाश करेंगे।
कीर्ति आज़ाद ने कहा कि काकोली दस्तीदार कैमरे पर 5 लाख रुपये लेते हुए पकड़ी गई थीं। तब उनकी ईमानदारी कहाँ गई थी? फिर भी आज वह ममता बनर्जी से रिश्वत के बारे में सवाल करती हैं। जब वह रिश्वत की बात करती हैं, तो उन्हें यह भी बताना चाहिए कि शुरुआती आठ लोगों में से कितनों ने रिश्वत ली थी. मुझे ये सारी बातें पता हैं। एक दिन मैं उनका पर्दाफ़ाश करूँगा। मेरा इरादा उन्हें उसी पल रंगे हाथों पकड़ने का है जब वे 10 लाख रुपये सौंपेंगे। यह नामुमकिन नहीं है, क्योंकि जानकारी उनके अपने ही खेमे से मिलेगी।
आज़ाद ने बागी नेता रिताब्रता बनर्जी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पुराने विवादों और लेफ्ट से निकाले जाने के बावजूदए बनर्जी बार.बार राजनीतिक पद पाने की कोशिश करते रहे। आज़ाद ने कहा कि उस आदमी, रिताब्रता बनर्जी को ही ले लीजिए, जो इधर.उधर भटक रहा था और उस अश्लील वीडियो में शामिल था। लेफ्ट ने उसी वीडियो की वजह से उसे निकाल दिया था। वह श्युवराज से अपने लिए कोई सीट या पद दिलाने की गुहार लगाता रहा। उसे पहले एमपी बनाया गया, फिर ट्रेड यूनियन का अध्यक्ष और बाद में एमएलए। उससे वादा किया गया था कि अगर हमारी सरकार सत्ता में आई तो उसे लेबर मिनिस्टर का पद दिया जाएगा। लेकिन ऐसे एहसान.फरामोश लोगों के बारे में बात ही क्यों करें?
टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी के अभिषेक बनर्जी का केस न लड़ने के बयान पर आज़ाद ने कहा कि सब कुछ सुलझ गया है। वह भावुक इंसान हैं। उन्हें जल्दी गुस्सा आ जाता है। लेकिन दीदी के साथ उनके अच्छे संबंध हैं। आज़ाद ने श्ऑपरेशन लोटस के तहत बीजेपी के कथित दबाव वाले तरीकों के बारे में भी विस्तार से बताया। उन्होंने कहाए ष्जिन सांसदों ने साइन नहीं किया था, उनके घरों के अंदर बीजेपी के लोग बैठे थे। बाहर पुलिस पहरा दे रही थी। उनके घर तोड़ दिए गए। उनके परिवारों को डराया.धमकाया गया। कई लोग डर के मारे सामने आए हैं।
उन्होंने कहा कि बापी हलदर का घर पूरी तरह से तोड़ दिया गया था। वह कांप रहे थे। वह पहली बार सांसद बने हैं, युवा हैं। दो और लोग भी हैं। आप देख सकते हैं कि पहले आठ नामों को अलग स्याही से लिखा गया है, जबकि चौदह से अठारह तक के अगले ग्रुप को काली स्याही से लिखा गया है। उस ग्रुप में तीन मुसलमान भी शामिल हैं। अब बीजेपी को उनकी भी ज़रूरत है, भले ही वे आम तौर पर उनके बारे में बुरा.भला कहते हों, क्योंकि उन्हें दो.तिहाई बहुमत चाहिए।

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