तृणमूल के नाम और निशान को लेकर लड़ाई तेज

-ममता के पत्र के बाद रितब्रत पहुंचे चुनाव आयोग

-30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्य समिति का गठन
विशेष संवाददाता
कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस पर कब्जे को लेकर पार्टी के दोनों गुटों में लड़ाई तेज हो गयी है। एक ओर ममता बनर्जी ने तृणमूल का नाम और चिन्ह पर दावा किया है तो दूसरी ओर रितब्रत ने भी साफ कर दिया है कि असली तृणमूल कांग्रेस उनके पास है। रितब्रत बनर्जी के मुख्य कार्यकारी कार्यालय जाने के बाद अटकलें और तेज हो गईं है।
पार्टी पर कब्जे को लेकर चल रही लड़ाई के बीच पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को एक पत्र भेजा है। उन्होंने पत्र में तृणमूल कार्य समिति के सदस्यों की जानकारी दी है। सूची में 24 लोगों के नाम हैं. ममता का नाम अध्यक्ष के रूप में और अभिषेक का नाम अखिल भारतीय महासचिव के रूप में दर्ज है। ममता के पत्र के बाद मंगलवार की शाम को रितब्रता भी सीईओ के कार्यालय गए।
यह साफ नहीं हुआ है कि रितब्रत वहां क्यों गये थे. असली तृणमूल के सवाल पर विधानसभा में विपक्ष के नेता रितब्रत बनर्जी ने दावा किया कि अरूप रॉय को अध्यक्ष चुने जाने के बादए प्रक्रिया कानून के अनुसार पूरी हो गई थी। परिणामस्वरूप, अब असली तृणमूल कांग्रेस यही हैं। रितब्रत बनर्जी ने कहा कि नाम और चुनाव चिह्न अलग से मांगने की कोई आवश्यकता नहीं है। हम नाम या चुनाव चिह्न की मांग नहीं करेंगे।
रितब्रत के नेतृत्व में 22 जून को न्यूटाउन के एक होटल में तृणमूल नेताओं और प्रतिनिधियों का एक सम्मेलन हुआ था। वहां हावड़ा सेंट्रल के विधायक अरूप रॉय को तृणमूल का अध्यक्ष बनाया गया। फिरहाद हकीम, अरूप बिश्वास, रथिन घोष और सबीना यास्मीन को उपाध्यक्ष बनाया गया। रितब्रत बनर्जी, जावेद खान और संदीपान साहा को महासचिव बनाया गया। अखरूज्जमान को पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया गया। इस बैठक में 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्य समिति का गठन किया गया।

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