देवभूमि उत्तराखंड की हरित क्रांति का पर्व है हरेला: डॉ विनोद बछेती
*राजू बोहरा / वरिष्ठ संवाददाता*
मेरी भाषा मेरी पहचान दिल्ली एनसीआर में चल रही उत्तराखंडी भाषा मेरी भाषा मेरी पहचान के तहत नई सोच नई पहल संस्था द्वारा आर के पुरम नई दिल्ली में दिव्य व भव्य हरेला महोत्सव का आयोजन किया गया इस विशेष मौके पर महिलाओं ने एक से बढ़कर अनेक प्रस्तुतियां दी महिलाओं द्वारा उत्तराखंडी झोडे ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ा दी। कार्यक्रम में समस्त उत्तराखंड समाज ने आकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ा दी इस विशेष मौके पर अन्तर्राष्ट्रीय योग गुरु अरुण योगी जी,स्थानीय विधायक अनिल शर्मा, उद्योगपति नरेंद्र लडवाल एवं समाज के अनेकों गणमान्य हस्तियां उपस्थित रहे सभी ने कार्यक्रम को सराहा, देवभूमि उत्तराखंड के निवासी प्राचीन काल से ही प्रकृति के प्रति अपना प्रेम और अपनी जिम्मेदारी को बखूबी दर्शाते आएं हैं। उत्तराखंड में मनाया जाने वाला यह पर्व मूलतः पर्यावरण के साथ साथ कृषि विज्ञानं को भी समर्पित है। वैसे तो उत्तराखंड में साल में तीन बार हरेला बोया जाता है। चैत्र मास, श्रावण मास और अश्विन मास में। श्रावण मास में कर्क संक्रांति को मनाये जाने वाले हरेले का विशेष महत्त्व है।


