पेपर लीक रोकने वाला बिल राज्यसभा में पेश
-केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विपक्ष को घेरा
भारत पोस्ट संवाददाता
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने उच्च सदन में पेपर लीक रोकने वाला बिल पेश किया। उन्होंने यूपीए के समय और 2014 के बाद विपक्ष शासित राज्यों में हुए पेपर लीक की घटनाओं का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि जैसा कि हम सभी जानते हैं, यह बिल निचले सदन से पास हो चुका है,जहाँ इस पर चर्चा के लिए 10 घंटे का समय दिया गया था। बार.बार रुकावटों और शोर.शराबे के बीच भी चर्चा हुई और पूरा जवाब भी उसी हंगामे के बीच दिया गया। अब यह बिल ऊपरी सदन में आया है बुजुर्गों का सदन, वरिष्ठों का सदन, समझदारों का सदन, परिपक्व लोगों का सदन।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में कहा कि स्पेशल टास्क फोर्स द्वारा पेपर लीक की जांच 2.3 महीने के भीतर पूरी कर ली जाएगी। सिंह ने यह सवाल भी उठाया कि कई दशकों तक सरकारी परीक्षाओं में पेपर लीक की समस्या से निपटने के लिए कोई व्यापक कानून क्यों नहीं था, जब तक कि नरेंद्र मोदी सरकार ने 2024 में मूल कानून पेश नहीं किया। इससे पहले लोकसभा ने बुधवार को ‘लोक परीक्षा ;अनुचित साधन निवारण संशोधन विधेयक 2026” को मंजूरी दे दी।
नीट प्रश्नपत्र लीक की पृष्ठभूमि में लोक परीक्षा ;अनुचित साधन निवारण अधिनियम, 2024 में सख्त प्रावधान शामिल करने के लिए लाए गए इस संशोधन विधेयक पर हुई चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की कुछ टिप्पणियों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। इस कारण सदन की कार्यवाही पहले एक बार करीब 40 मिनट के लिए अपराह्न ढाई बजे तक और फिर तीन बजे तक स्थगित कर दी गई। तीन बजे सदन की बैठक शुरू होने पर कांग्रेस के सांसद ‘एलओपी को बोलने दो के नारे लगाते हुए हंगामा कर रहे थे।
हंगामे के बीच ही प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब दिया और उनके जवाब के बाद सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को मंजूरी प्रदान कर दी। विधेयक पारित होने के बाद कांग्रेस सांसदों की नारेबाजी के बीच ही अध्यक्ष ओम बिरला ने कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी। चर्चा का जवाब देते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि नीट प्रश्नपत्र लीक के मामले में सरकार ने फौरन कार्रवाई की और 12 जुलाई को जांच सीबीआई को सौंप दी गई। उन्होंने कहा कि कल इस मामले में आरोपपत्र दायर कर दिया गया है और आज से सुनवाई शुरू हो गई है। सिंह ने कहा कि नए संशोधन विधेयक के प्रभाव में आने के बाद फास्ट ट्रैक अदालत में सुनवाई के साथ इस मामले में पांच महीने में फैसला आ जाएगा।



