गर्मियों में पटना के घुड़दौड़ रोड में आराम फरमाते घोड़े

सफरनामा

 

राजीव कुमार झा

पटना में दीघा का घुड़दौड़ रोड और वहां सुबह में सड़क किनारे आराम फरमाते घोड़े सबका ध्यान अपनी तरफ आकृष्ट करते हैं। उन दिनों खूब गर्मी पड़ रही थी और कभी कभार बारिश भी हो रही थी। आशियाना दीघा रोड से आगे घुड़दौड़ रोड शुरू होता है और मैं रोज पैदल ही इस दूरी को तय करता था क्योंकि वाइस प्रिंसिपल ने मुझे स्कूल बस से स्कूल आने की सुविधा नहीं प्रदान की थी। मेरे पास पैसों की कोई कमी नहीं थी लेकिन स्कूल आना- जाना घोड़ों पर चढ़कर करना संभव नहीं था । सुबह ज्यादातर घोड़े अलसाये से दिखाई देते थे और दोपहर में खूब गर्मी पड़ रही थी। बारहवीं में पढ़ाने वाले एक शिक्षक ने मुझे दोपहर में घुड़दौड़ रोड तक बाइक पर बिठाकर रोज पहुंचा देने का वायदा किया लेकिन खुर्शीद ने उसे मना किया। वह वहां आफिस संभालता था। खैर …घोड़े पर चढ़कर ज्ञान निकेतन गर्ल्स स्कूल, दीघा जाने का ख्याल कभी नहीं आया। वहां मुझे देखकर लोगों को भी अजीब लगता और घोड़े वाला महीने में एक लाख से कम नहीं लेता।
अनंत सिंह को पटना के गांधी मैदान में जाकर अपने बेटे को घुड़सवारी सिखाना चाहिए। ऐसे यह मेरी एक सलाह है और इसमें भी उनको कलक्टर या अनुमंडलाधिकारी से अनुमति लेनी होगी। पटना की सड़कों पर घोड़े लेकर लोग निकलते हैं। पटना के दीघा के इलाकों में भी घुड़सवार सब रहते हैं और वहां जब ज्ञान निकेतन गर्ल्स स्कूल में मैं पढ़ा रहा था तो कभी – कभी काफी लोग घोड़ों पर सवार होकर कहीं जाते दिखाई देते थे। मुझे बाद में पता चला कि घोड़े पर सवार वे लोग जुलूस और जलसों में कहीं जा रहे थे। वहां स्कूल बस के ड्राइवर ने दीघा के घुड़सवारों के बारे में ऐसा बताया। पटना में दीघा का यह रोड घुड़दौड़ रोड के नाम से प्रसिद्ध है। इसी रोड के एक हिस्से का नामकरण आचार्य किशोर कुणाल रोड कर दिया गया है।

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