फुटपाथ अतिक्रमण और शहर के बुनियादी ढांचे पर सरकार का कड़ा रुख, विपक्ष पर साधा निशाना

कोलकाता : कोलकाता में फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त करने, अवैध पार्किंग हटाने और शहर में बढ़ती यातायात समस्या को दूर करने को लेकर राज्य सरकार ने अपना रुख साफ कर दिया है। फुटपाथों से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों का सरकार ने कड़ा जवाब दिया है। सरकार का कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य किसी की रोजी-रोटी छीनना नहीं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा और शहर की व्यवस्था को बेहतर बनाना है।
सरकार की ओर से कहा गया कि व्यस्त सड़कों और फुटपाथों पर छोटे बच्चों के साथ परिवारों का रहना बेहद जोखिमपूर्ण है। ऐसे स्थानों पर कभी भी दुर्घटना हो सकती है और किसी मासूम की जान जा सकती है। सरकार ने सवाल उठाया कि यदि इस तरह की स्थिति में कोई बड़ा हादसा होता है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? इसी कारण फुटपाथों को सुरक्षित और आम पैदल यात्रियों के लिए सुगम बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
शासक दल के एक वरिष्ठ प्रतिनिधि ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले करीब 15 वर्षों में प्रशासनिक स्तर पर पैदा हुई शिथिलता और बुनियादी ढांचे से जुड़ी समस्याएं अब गंभीर रूप ले चुकी हैं। उनका कहना था कि इन समस्याओं को एक दिन या कुछ सप्ताह में पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है, लेकिन सरकार लगातार सुधार की दिशा में काम कर रही है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि फुटपाथ किसी एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि आम नागरिकों की आवाजाही के लिए बनाए गए हैं। सरकार के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों में भी फुटपाथों को पैदल यात्रियों के उपयोग के लिए रखने की बात स्पष्ट रूप से सामने आई है। इसी आधार पर फुटपाथों को अतिक्रमण से मुक्त करने की कार्रवाई की जा रही है।
सरकारी प्रतिनिधि ने कहा कि फुटपाथ अमीर और गरीब में कोई अंतर नहीं करता। हर नागरिक को सुरक्षित तरीके से सड़क पर चलने का अधिकार है। इसलिए फुटपाथों को खाली कराकर उन्हें पैदल यात्रियों के लिए उपयोगी बनाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
दूसरी ओर, राज्य सरकार ने शहर के बुनियादी ढांचे को औद्योगिक निवेश से भी जोड़कर देखा है। सरकार का तर्क है कि यदि राज्य में नए उद्योग और विदेशी निवेश लाना है तो शहर की सड़कों, यातायात व्यवस्था और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना होगा। निवेशक यदि शहर में आने के बाद लगातार जाम, खराब सड़क और जल निकासी की समस्या देखते हैं, तो इससे निवेश के फैसले पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
इसी वजह से शहर की सड़कों और ड्रेनेज व्यवस्था में सुधार के काम को तेज किया गया है। सरकार का दावा है कि लंबे समय से जमा समस्याओं को चरणबद्ध तरीके से दूर करने के लिए विभिन्न स्तरों पर काम चल रहा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि आगामी अक्टूबर तक सड़कों की मरम्मत से जुड़े अधिकांश जरूरी काम पूरे कर लिए जाएं।
सरकार ने यह भी माना कि पिछले 15 वर्षों में जमा हुई समस्याओं को केवल 100 दिनों में जादुई तरीके से खत्म नहीं किया जा सकता। हालांकि, चुनाव के दौरान जनता से किए गए वादों को पूरा करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। सरकार का कहना है कि विकास, बेहतर यातायात व्यवस्था, सुरक्षित फुटपाथ और मजबूत शहरी बुनियादी ढांचा तैयार करना उसकी प्राथमिकता है।
फुटपाथ अतिक्रमण के मुद्दे पर जारी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सरकार ने साफ किया है कि कार्रवाई का मकसद आम लोगों की परेशानी कम करना और शहर को अधिक सुरक्षित एवं व्यवस्थित बनाना है। अब आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अतिक्रमण हटाने के साथ प्रभावित लोगों के पुनर्वास और आजीविका के लिए प्रशासन किस तरह की व्यवस्था करता है।

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