लौंडवन की यह कैसी उमरिया

कविता

 

राजीव कुमार झा

6 नवंबर 2025 के दिन
लालटेन जलाओ
सब लोग बिजली की
मुफ्त रोशनी से
बिहार के गांव शहर में
चतुर्दिक चकाचौंध फैला
अंधेरा मिटाओ
नया लालू युग बिहार में लाओ
लखीसराय में आकर
जीत का बाजा बजाओ
शहीद द्वार को सजाओ
यहां मुसलमानों के साथ
अब अपना शासन चलाओ
आरा में सोन नदी के तट पर
जाकर
तेज प्रताप के संग
चैता गाओ और नदिया के पार
गुंजा को लेकर
चुपके से रीतलाल के घर पर
अब पटना पुलिस से नज़र
बचाकर
दानापुर आ जाओ
लालू प्रसाद के घर पर
खबर पठाओ
छठ का प्रसाद बंधवाओ
नीतीश कुमार को भी बुलवाओ
जनशक्ति निवास में गूंज रही
पायल की झंकार गोरी
वसंत बहार में हंसती
अब कोई बनकर अल्हड़ छोरी…
सजना को लगती
अब भी ऐश्वर्या सबसे भोली
होली के दिन
गंगा तट पर चल रही
प्रेम की गोली…
भीगे रेशम की चोली
ओढ़े चुनावी चुनरिया
महके अंग – अंग बाजे बांसुरिया
महुआ के जंगल में बसी
प्रेम प्यार की वृंदावन नगरिया
साधु देखें लौंडवन की
यह कैसी उमरिया
मेहरारू को
मेहरारू भी ना समझे
बारह साल से
किस जंगल में पुत्र सरीखा
भगिना आवारों के संग घूमे
पीली धोती पहने
अब कौन जाए
इस छोरी के भाय बाप को कहने
नापसंद करते लालू
राजनीति में लगते मेरे सच्चे सालू
पिछड़े तबकों की सारी जनता
उनको कहती रहती
जेल में जाकर सालों साल से साधु – साधु!

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