युद्ध के क्षेत्र अगर कोई योद्धा या वीरांगना वीरता से लड़ते हुए हार न मानकर वीरगति को प्राप्त करे तो वह हारकर भी दिल जीत जाते हैं।

 

अजित प्रसाद
फाइनल हार गए तो कोई अब चर्चा भी नही कर रहा लेकिन युद्ध के क्षेत्र अगर कोई योद्धा या वीरांगना वीरता से लड़ते हुए हार न मानकर वीरगति को प्राप्त करे तो वह हारकर भी दिल जीत जाते हैं। दक्षिण अफ्रीका महिला टीम की कप्तान लौरा वूल्वर्ट वही महसूस कर रही होंगी जो साल 2023 विश्वकप में विराट कोहली और साल 2003 विश्वकप में सचिन तेंदुलकर फाइनल की हार के बाद महसूस किए थे। इन सभी ने बल्ले से पूरे टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाए थे और अपनी टीम को फाइनल तक पहुंचाए थे लेकिन इसके बावजूद फाइनल में मिली हार की वजह विश्वकप ट्रॉफी उनसे भी दूर ही रही थी।

दक्षिण अफ्रीका महिला टीम की कप्तान लौरा वूल्वर्ट बेहद शांत स्वभाव की खिलाड़ी हैं। लौरा वूल्वर्ट ने सेमीफाइनल मुकाबले में इंग्लैंड महिला टीम के खिलाफ जो 169 रनों की पारी खेली थी और शक्तिशाली इंग्लैंड महिला टीम को सेमीफाइनल में नेस्तनाबूत किया था और अपनी टीम को फाइनल में पहुंचाया था। उससे उनके जुझारूपन का अंदाजा लग जाता है।

भारतीय महिला टीम के खिलाफ फाइनल मुकाबले में लौरा वूल्वर्ट ने एक बार फिर से अपनी टीम के लिए शतकीय पारी खेली। वह अकेले ही अपनी टीम के लिए लड़ाई लड़ती रहीं। अंत में वह हार गईं लेकिन उनके जुझारूपन से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। कप्तान के रूप में लौरा वूल्वर्ट इस विश्वकप की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी साबित हुई हैं। सचिन तेंदुलकर,विराट कोहली और लौरा वूल्वर्ट बदकिस्मत खिलाड़ी रहे जो किसी वनडे विश्वकप में सबसे ज्यादा रन बनाने के बावजूद उस साल ट्रॉफी नही जीत सके।

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