पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने ‘कोलकाता व्याख्यानमाला तृतीय सत्र- 100 वर्ष की संघ यात्रा
- संघ हिंदुओं के संरक्षण के पक्ष में पर मुसलमानों का विरोधी नहीं: मोहन भागवत
अजित प्रसाद, विशेष संवाददाता / सिलीगुड़ी: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने ‘कोलकाता व्याख्यानमाला तृतीय सत्र- 100 वर्ष की संघ यात्रा: नए क्षितिज’ कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि धारणा है कि संघ मुस्लिम विरोधी है, जबकि संघ में कोई दरवाजा बंद नहीं है। कभी आकर आरएसएस को देखिए। अगर लगता है कि हम मुस्लिम विरोधी हैं, तो ऐसी धारणा बनाइए। उन्होंने आगे कहा कि अगर आपको संघ मुस्लिम विरोधी लगता है, तो आप अपनी धारणा बदलिए। मैं कहता हूं कि अब समझाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि समझने के लिए आपके सामने बहुत कुछ मौजूद है और जिसे नहीं समझना है, उसे समझाकर कोई फायदा नहीं है। अगर जानना है तो आकर देखिए, उसके बाद जैसी भी आपकी राय बनती है, बना लीजिए। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि मैं चैलेंज करता हूं कि आकर आरएसएस को देखिए। बहुत लोग हमें देखने के लिए आए हैं और देखकर उन्होंने माना है कि आप लोग मुस्लिम विरोधी नहीं हैं। आप लोग कट्टर राष्ट्रवादी हैं और हिंदुओं के संरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन मुसलमानों के विरोधी नहीं हैं। मोहन भागवत ने कहा कि मुसलमानों को यह समझना चाहिए कि पूजा-पद्धति से वे अलग हैं, लेकिन संस्कृति, राष्ट्र और समाज के नाते एक ही बड़ी इकाई के अंग हैं। बस यह समझने से सब ठीक हो जाएगा। इसके अलावा कोई बड़ी समस्या नहीं है। उन्होंने कहा कि एक झगड़ा शुरू हुआ और अंत में मामला कोर्ट के पास गया। कोर्ट ने लंबे समय तक विचार करने के बाद निर्णय दिया और वहां राम मंदिर बन गया। मंदिर-मस्जिद वाला झगड़ा समाप्त हो गया। उन्होंने कहा कि अब फिर से बाबरी मस्जिद बनाकर उस झगड़े को शुरू किया जा रहा है। यह राजनीतिक षड्यंत्र है। यह सिर्फ वोट के लिए हो रहा है। न यह मुसलमानों के लिए है और न ही हिंदुओं की भलाई के लिए। झगड़ा खत्म हो रहा है और अच्छी सद्भावना बनेगी, लेकिन इस तरह फिर से खाई को चौड़ा करने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसा नहीं होना चाहिए। सेक्युलरिज्म के दायरे में रहते हुए हिंदुओं की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा सकती है और हिंदुत्व की नींव पर युवाओं का निर्माण कैसे किया जाए? इस सवाल के जवाब में भागवत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य का आधार धर्म नहीं, बल्कि कानून है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हिंदुत्व को केवल कर्मकांडों या धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।
युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने ये भी कहा कि अगर हिन्दू जाग जाएं तो बंगाल की सत्ता में परिवर्तन कोई नहीं रोक सकता है। उन्होंने आगे कहा कि केवल मंदिर जाना ही हिंदू होने की पहचान नहीं है, बल्कि व्यक्ति का आचरण, नैतिकता और समाज के प्रति उसका व्यवहार ही उसका वास्तविक धर्म है।भागवत के इस बयान को हिंदुत्व और सेक्युलरिज्म के बीच संतुलन स्थापित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने धार्मिक पहचान से अधिक मानवीय मूल्यों और कानून के शासन पर जोर दिया।
अगर हिन्दू समाज जाग जाए तो बंगाल की सत्ता…
मोहन भागवत ने हिन्दू समाज , ‘…अगर हिंदू समाज एकजुट हो जाए, तो बंगाल में स्थिति बदलने में ज़्यादा समय नहीं लगेगा।अब, राजनीतिक बदलाव पर अपने विचारों के बारे में, मैं आपको बताना चाहता हूं कि राजनीतिक बदलाव के बारे में सोचना मेरा काम नहीं है। हम संघ के ज़रिए सामाजिक बदलाव के लिए काम कर रहे हैं…’
सेक्यूलरिज्म को लेकर दूर किया भ्रम: मोहन भागवत ने सेक्युलरिज्म को लेकर अक्सर होने वाले भ्रम को दूर करने की कोशिश की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सेक्युलरिज्म कोई पश्चिमी अवधारणा नहीं जिसे थोपा गया हो, बल्कि यह शासन चलाने की एक व्यवस्था है। भागवत ने कहा, सेक्युलरिज्म शासन की एक पद्धति है. राज्य की सत्ता चलाने वाली कोई भी व्यवस्था हमेशा से सेक्युलर रही है और राज्य सेक्युलर ही रहेगा। यह बात समझनी होगी।उनका यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अक्सर हिंदुत्ववादी संगठनों पर संविधान के सेक्युलर ढांचे को चुनौती देने के आरोप लगते हैं। लेकिन संघ प्रमुख ने यहां स्पष्ट कर दिया कि राज्य का संचालन किसी विशेष उपासना पद्धति या धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि कानून के आधार पर होता है। राज्य को पंथनिरपेक्ष होना ही चाहिए।
सूर्य पूरब से निकलता है, हमें नहीं पता ये कब से हो रहा है…
‘हिंदू राष्ट्र’ पर RSS चीफ मोहन भागवत ने आगे कहा, ‘…सूरज पूरब से उगता है। हमें नहीं पता कि यह कब से हो रहा है। तो क्या इसके लिए भी हमें संवैधानिक मंज़ूरी चाहिए? हिंदुस्तान एक हिंदू राष्ट्र है।जो भी भारत को अपनी मातृभूमि मानता है, वह भारतीय संस्कृति की कद्र करता है।जब तक हिंदुस्तान की धरती पर एक भी इंसान ज़िंदा है जो भारतीय पूर्वजों की शान में विश्वास करता है और उसे संजोता है, भारत एक हिंदू राष्ट्र है। यह संघ की विचारधारा है। अगर संसद कभी संविधान में संशोधन करके वह शब्द जोड़ने का फैसला करती है। चाहे वे ऐसा करें या न करें, कोई बात नहीं। हमें उस शब्द से कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि हम हिंदू हैं और हमारा राष्ट्र एक हिंदू राष्ट्र है। यही सच। पीएम आजन्म पर आधारित जाति व्यवस्था हिंदुत्व की पहचान नहीं है। बांग्लादेश पर बोले – सीमा की स्थिति पर गंभीरता जरूरी
बांग्लादेश, अवैध घुसपैठ और बंगाल की संवेदनशील स्थिति पर उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा, जनसंख्यात्मक संतुलन और सामाजिक सौहार्द पर गंभीरता से विचार आवश्यक है। समाधान केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता से भी निकलेगा। बांग्लादेश के हिन्दुओं की दुर्दशा कब समाप्त होगी, इसके लिए यही समाधान है कि वहां के जितने भी हिन्दू हैं वे संगठित रहें। ऐसे समय में हिंदुओं को अपनी सुरक्षा के लिए एकजुट रहना होगा. भागवत ने दुनियाभर के हिंदुओं से अपील की कि वे बांग्लादेश के हिंदुओं की हर संभव मदद करें.
भारत हिंदुओं के लिए एकमात्र देश- भागवत
मोहन भागवत ने कहा कि भारत अपनी सीमाओं के भीतर रहकर जितनी मदद कर सकता है, उतनी मदद करनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि भारत हिंदुओं के लिए एकमात्र देश है इस मुद्दे पर भारत सरकार को संज्ञान लेना होगा. उन्होंने संकेत दिया कि सरकार इस दिशा में कुछ कर भी सकती है, लेकिन सभी बातें सार्वजनिक नहीं की जा सकतीं।भारत और दुनिया के देशों को चाहिए कि वे मर्यादा में रहकर बांग्लादेश के हिन्दुओं की रक्षा के लिए जो कर सकते हैं वह करें। अंत में सरसंघचालक ने कहा कि संघ समाज को बांटने नहीं, जोड़ने का कार्य करता है। 100 वर्षों की यात्रा के बाद संघ का लक्ष्य और अधिक समर्पित, संस्कारित और राष्ट्रनिष्ठ समाज का निर्माण है, जिसमें विचार भिन्न हो सकते हैं, लेकिन मन और उद्देश्य एक हों।



