बैकुंठपुर के जंगल में देवी बनदुर्गा की खास रात की पूजा, भक्तों पर कड़ी नज़र

 

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अजित प्रसाद,सिलीगुड़ी: बनदुर्गा पूजा के लिए शुक्रवार रात बैकुंठपुर के घने जंगल में बड़ी संख्या में भक्त उमड़े। सिलीगुड़ी से सटे राजगंज ब्लॉक में फराबारी के पास डेल्हीविता चंद्र नहर से सटे बनदुर्गा मंदिर में सुबह से ही भक्त बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। पुरानी परंपरा के अनुसार, देवी बनदुर्गा की खास रात की पूजा देर रात होती है।

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पौष महीने की पूर्णिमा के दिन होने वाली इस पूजा में दूर-दूर से भक्त देवी के दर्शन और पूजा-अर्चना करने आते हैं। घने जंगल के बीच बने इस पक्के मंदिर में शुक्रवार सुबह से ही त्योहार का माहौल है। पूजा कमिटी ने बताया कि इस साल बनदुर्गा पूजा का 45वां साल है।

पूजा कमिटी के सेक्रेटरी राजू साहा ने कहा कि इस बनदुर्गा पूजा से एक लंबा इतिहास और लोककथा जुड़ी हुई है। देवी चौधुरानी और भवानी पाठक की यादों से जुड़ी इस जगह का ज़िक्र साहित्य सम्राट बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के नॉवेल ‘देवी चौधुरानी’ में मिलता है। हालांकि पहले यहां थानाथानिया मां पूजा मनाई जाती थी, लेकिन समय के साथ इस त्योहार को बंदुर्गा पूजा के नाम से जाना जाने लगा।

भक्तों की सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने के लिए पूजा कमिटी के साथ-साथ प्रशासन भी कड़े सुरक्षा उपाय करता है।

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