TMC पार्षद ने असम के मुख्यमंत्री पर किया आपत्तिजनक कटाक्ष

बंगाल की राजनीति में फिर भाषा की मर्यादा तार-तार

 

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अजित प्रसाद,नबद्वीप, : पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर शब्दों की मर्यादा लांघने का मामला सामने आया है। नबद्वीप में आयोजित एक विरोध सभा के दौरान तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक पार्षद ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर बिना नाम लिए बेहद अभद्र और विवादित टिप्पणी की है। इस दौरान मंच पर पार्टी के जिला अध्यक्ष और राज्य प्रवक्ता भी मौजूद थे।शनिवार को नबद्वीप शहर के 16 नंबर वार्ड स्थित निशान क्लब मैदान में नबद्वीप शहर तृणमूल कांग्रेस द्वारा एक विरोध सभा का आयोजन किया गया था। इस सभा में राणाघाट सांगठनिक जिला टीएमसी अध्यक्ष देबाशीष गांगुली, नबद्वीप के विधायक पुंडरीकाक्ष साहा और राज्य प्रवक्ता जया दत्ता सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित थे। सभा के दौरान वक्ताओं ने चुनाव आयोग और भाजपा पर जमकर हमला बोला।
असली विवाद सभा के बाद तब शुरू हुआ जब मीडिया ने असम के मुख्यमंत्री द्वारा हाल ही में बंगाली भाषी मुस्लिमों को लेकर दिए गए विवादित बयान (रिक्शा किराए से संबंधित) पर प्रतिक्रिया मांगी।जिला अध्यक्ष देबाशीष गांगुली ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि को अपने पद की मर्यादा रखनी चाहिए और ऐसे व्यक्ति को कड़ा दंड मिलना चाहिए। जैसे ही अध्यक्ष ने अपनी बात खत्म की, उनके बगल में खड़े नबद्वीप नगरपालिका के पार्षद बिमान कृष्ण साहा ने कैमरे के सामने बेहद आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा— “शेर का बच्चा शेर होता है, और सूअर का बच्चा सूअर ही होता है।”हैरानी की बात यह रही कि जब पार्षद बिमान कृष्ण साहा यह शर्मनाक टिप्पणी कर रहे थे, तब उनके बगल में राज्य प्रवक्ता जया दत्ता और जिला अध्यक्ष देबाशीष गांगुली समेत कई बड़े नेता खड़े थे, लेकिन किसी ने भी उन्हें टोकने या भाषा को सुधारने की कोशिश नहीं की।गौरतलब है कि हाल ही में असम के मुख्यमंत्री ने एक सभा में कहा था कि अगर कोई ‘मिया’ (बंगाली भाषी मुस्लिम) रिक्शा चालक 5 रुपये किराया मांगे, तो उसे 4 रुपये ही दें। इसी बयान के विरोध में तृणमूल कांग्रेस ने इस सभा का आयोजन किया था, लेकिन विरोध प्रदर्शन अब खुद एक ‘भाषा विवाद’ में तब्दील हो गया है।

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