कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में संपन्न हुई ईद-उल-जुहा की नमाज़
* रेड रोड पर रोक के बाद पहली बार बदला गया स्थान
अजित प्रसाद/ कोलकाता: पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद से ही कई प्रशासनिक फैसलों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं तेज हैं। इसी बीच राज्य सरकार द्वारा जारी एक महत्वपूर्ण अधिसूचना (नोटिफिकेशन) के तहत इस बार ईद की नमाज़ का स्थान बदल दिया गया। सरकार ने स्पष्ट किया था कि अब से कोलकाता के रेड रोड पर ईद की नमाज़ आयोजित नहीं की जाएगी। प्रशासन का तर्क था कि रेड रोड पर नमाज़ के कारण लंबे समय तक यातायात (ट्रैफिक) ठप रहता है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी होती है और शहर की कानून-व्यवस्था व ट्रैफिक प्रणाली पर बुरा असर पड़ता है।
सरकार के इस नए फैसले के तहत इस बार ईद-उल-जुहा (बकरीद) की नमाज़ के लिए ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड को निर्धारित किया गया था। प्रशासन ने पहले ही आश्वस्त किया था कि शांतिपूर्ण माहौल और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए नमाज़ का आयोजन किया जाएगा।
ब्रिगेड ग्राउंड में उमड़ा जनसैलाब, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
आज सुबह ब्रिगेड परेड ग्राउंड में ईद-उल-जुहा की पवित्र नमाज़ शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। भोर होते ही शहर और आसपास के विभिन्न इलाकों से मुस्लिम समुदाय के लोग ब्रिगेड ग्राउंड की तरफ बढ़ने लगे। नमाज़ में शामिल होने के लिए हजारों की संख्या में अकीदतमंद पहुंचे, जिससे पूरा इलाका धार्मिक उत्साह, त्योहार की खुशी और शांति के संदेश से सराबोर हो गया।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन बेहद सख्त नजर आया। पूरे ब्रिगेड मैदान और उसके आसपास के इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। किसी भी अप्रिय घटना या सांप्रदायिक उकसावे को रोकने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल, रैफ (RAF), क्विक रिस्पांस टीम (QRT) और सादे कपड़ों में खुफिया पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।
चेकिंग पॉइंट्स: ब्रिगेड परेड ग्राउंड के सभी प्रवेश द्वारों पर मल्टीपल चेकिंग पॉइंट्स बनाए गए थे, जहां गहन सुरक्षा जांच के बाद ही लोगों को मैदान में प्रवेश दिया गया।
ड्रोन से निगरानी: प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, पूरे इलाके की निगरानी ड्रोन कैमरों के जरिए की गई। कोलकाता पुलिस के आला अधिकारी खुद कंट्रोल रूम और जमीन पर मौजूद रहकर स्थिति पर पल-पल की नजर बनाए हुए थे।
नमाज़ के बाद देश और राज्य की तरक्की के लिए दुआ
नमाज़ संपन्न होने के बाद इमामों ने मंच से शांति, सौहार्द और भाईचारे का संदेश दिया। इस दौरान देश में अमन-चैन, राज्य की उन्नति और सभी नागरिकों के कल्याण के लिए विशेष दुआ मांगी गई। नमाज़ के बाद मैदान में मौजूद विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों की ओर से नमाज़ियों के लिए पीने के पानी और प्राथमिक चिकित्सा (फर्स्ट एड) की भी व्यवस्था की गई थी।
फैसले पर राजनीतिक हलचल और प्रतिक्रियाएं
जनता और विपक्ष का रुख: रेड रोड से नमाज़ को स्थानांतरित करने के सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जहां आम जनता के एक बड़े वर्ग ने शहर को जाम से मुक्ति दिलाने और प्रशासनिक सुचारू व्यवस्था के लिए सरकार के इस कदम का समर्थन किया है, वहीं विपक्षी दलों के एक धड़े का कहना है कि दशकों पुरानी परंपरा और रेड रोड के ऐतिहासिक महत्व को बदलने से लोगों में असमंजस का माहौल है।
हालांकि, प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह निर्णय किसी राजनीति के तहत नहीं, बल्कि पूरी तरह से कानून-व्यवस्था और जनहित (पब्लिक इंटरेस्ट) को ध्यान में रखकर लिया गया है। नमाज़ खत्म होने के बाद लोग शांतिपूर्वक मैदान से रवाना हुए, जिसके बाद शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह सामान्य बनी रही। प्रशासन ने दावा किया है कि बिना किसी अप्रिय घटना के पूरा आयोजन बेहद सफल रहा।



