स्वतंत्रता आंदोलन और देश की आजादी !
विचार विमर्श:
राजीव कुमार झा
आजादी के आंदोलन में तमाम धर्मों और प्रांतों के लोगों की भागीदारी भारत में ब्रिटिश शासन और इसके विरुद्ध देशवासियों के संघर्ष का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। स्वतंत्रता आंदोलन में वंदे मातरम जिसे हमारे देश का राष्ट्रगीत भी माना जाता है इसकी काफी बड़ी भूमिका रही। इस पवित्र गीत की पहली पंक्ति देश की आजादी के लिए कुर्बान होने वाले दीवानों का
धारा बन गयी थी और क्रांतिकारी आंदोलन के प्रचार-प्रसार के दिनों में यह गीत जेल के फांसी घर में भी सुनाई देने लगा। भारत के लोगों ने अपनी आजादी के आंदोलन में उत्साह से भाग लिया और द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम कुछ सालों में सिंगापुर में आजाद हिन्द फौज की स्थापना के बाद सारे देश में देशभक्ति का ज्वार उमड़ आया था। महात्मा गांधी ने इसी दौरान अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा देकर स्वाधीनता संग्राम में प्राण फूंक दिया था। हमारी आजादी की लड़ाई में अनगिनत लोग शहीद हुए। हमें उनसे प्रेरणा ग्रहण करनी चाहिए।
भारत की आजादी के साथ देश का बंटवारा हो गया और इसके नासूर के रूप में कश्मीर की समस्या निरंतर सारे देश के मन को सालती रहती है। यह अत्यंत दुख की बात है कि सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों के आधार पर आजादी हासिल करने वाला यह देश आज आतंकवाद के रूप में अपने ही पड़ोसी मुल्क की हिंसक गतिविधियों का सामना करते हुए निरंतर त्रस्त बना दिखाई देता है। भारत एक अत्यंत प्राचीन देश है और पाकिस्तान – बांग्लादेश के निर्माण के साथ संसार के मानचित्र पर इसका भौगौलिक नक्शा भी बदलता चला गया। यह देश संसार में शांति प्रेम और मैत्री की भूमि माना जाता है। दुनिया के वर्तमान माहौल में अब सर्वत्र कटुता व्याप्त होती जा रही है। संसार के स्वतंत्रत देश के रूप में भारत के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण परिस्थिति है और हम विवेक संयम और दृढ़ता से ही अपने भविष्य का कोई सर्वसम्मत रास्ता निकाल सकते हैं।
स्वतंत्रता दिवस आजादी की याद में मनाया जाता है लेकिन यह दिन हमें देश के वर्तमान जीवन के बारे में भी चिंतन का संदेश देता है। भारत में स्वतंत्रता के काफी साल गुजर चुके हैं और अब हमारा देश विकास की राह पर काफी आगे बढ़ चुका है। गौर से अपने देश के इतिहास को अगर हम देखें तो स्वतंत्रता आज हमारी सबसे बड़ी विरासत प्रतीत होती है। सचमुच हमारे देश की हजारों साल पुरानी संस्कृति का सार संदेश स्वतंत्रता के जीवन मंत्र में समाहित है। आजादी के बाद हमारे देश में लोकतंत्र को
शासन व्यवस्था के रूप में अपनाया गया है और यहां जनता के हाथों में हुकूमत की बागडोर सौंपी गई है लेकिन इसमें अनेकों प्रकार की विषमताएं भी पिछले कुछ दशकों के दौरान उभर कर सामने आयी हैं। हमारे देश में पिछले कुछ सालों से भ्रष्टाचार काफी बड़ा मुद्दा बनता दिखाई देता है और इसके साथ यहां राजनीति में नेताओं का व्यक्तिगत स्वार्थ सबसे अहम मुद्दा बनता चला जा रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन हमें तमाम संकीर्णताओं से ऊपर उठकर लोकतंत्र के बुनियादी आदर्शों की ओर उन्मुख करता है।


