आस्था एवं भावना से जुड़ा है पितृ पक्ष श्राद्ध, आध्यात्मिक विज्ञान में भी है महत्व : महंत राजेंद्र पुरी
जग ज्योति दरबार में श्रद्धालुओं ने पितृ पक्ष में करवाया पूजन व अनुष्ठान
कुरुक्षेत्र, : पितृ पक्ष श्राद्ध के चलते शनिवार को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु जग ज्योति दरबार में पहुंचे। दरबार में श्रद्धालुओं ने महंत राजेंद्र पुरी की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में पूजन तथा अनुष्ठान सम्पन्न करवाया। महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि समाज के कुछ लोग श्राद्ध पक्ष को अंधविश्वास मानते हैं, लेकिन यदि हम श्राद्ध कर्म के पीछे के विज्ञान को समझेंगे तो अपने आप ही समझ में आएगा कि यह कर्म करना क्यों जरूरी है। उन्होंने कहा कि पितृ पक्ष श्रद्धा आस्था, पूर्वजों के सम्मान एवं भावना से जुड़ा है। भावना एवं आस्था से जुड़ा होने का अर्थ है कि अपने पिता, दादा और परदादा इत्यादि बुजुर्गों के प्रति अभी भी श्रद्धा का भाव रखते हैं। जिन बुजुर्गों ने बच्चों के जीवन के लिए खुद का जीवन लगा दिया, तो क्या बच्चे वर्ष में एक बार भी उन्हें याद नहीं करेंगे। महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि इसलिए श्राद्ध का संबंध बच्चों का अपने पितरों के प्रति सम्मान और श्रद्धा से जुड़ा विषय है। उन्होंने बताया कि आध्यात्मिक विज्ञान से जुड़ा होने का अर्थ है कि मरने के बाद अतृप्त आत्माएं भटकती रहती हैं। उनके इस भटकाव और परिवार के प्रति आसक्ति के भाव को रोककर उन्हें अगले जन्म के लिए तैयार करना या यदि लोक-परलोक है तो वहां तक जाने की यात्रा को सुगम करने की क्रिया है श्राद्ध कर्म। व्यक्ति किसी भी उम्र या अवस्था में मरा हो उसकी इच्छाएं यदि बलवती हैं तो वह अपनी इच्छाओं को लेकर मृत्यु के बाद भी दुखी ही रहेगा और मुक्त नहीं हो पाएगा। यही अतृप्तता है। जो व्यक्ति भूखा, प्यासा, विरक्त, राग, क्रोध, द्वेष, लोभ, वासना आदि इच्छाएं और भावनाएं लेकर मरा है अवश्य ही वह अतृप्त होकर भटकता रहेगा। मनोवैज्ञानिक तरीके से उसके इस भटकाव को श्राद्ध कर्म रोककर सद्गति देता है। इस अवसर पर सोहन लाल, बृजपाल, अजय गुप्ता, सुरेंद्र राणा, राजेंद्र सैनी, रोहताश सैनी, सतीश राणा, भारत, विजय गुलाटी, रोशन गुलाटी, माध्वीका, देशबंधु, कल्याण चौहान, विशेष शर्मा, तेजस्वनी, दर्शना देवी, नंदनी शर्मा, अजय राठी, विजय राठी तथा अक्षय राठी भी मौजूद रहे।
फोटो परिचय : महंत राजेंद्र पुरी श्रद्धालुओं के साथ।

