पहाड़ी बाबा — चमत्कार आज भी जीवंत

 

*बलवान सिंह ब्यूरो चीफ बाराबंकी* भारत की आस्था भूमि में ऐसे अनेक संत महात्माओं का वास रहा है, जिनकी दिव्य लीलाएँ आज भी लोगों को श्रद्धा और विश्वास से भर देती हैं। बाराबंकी के प्रसिद्ध तीर्थ श्री लोधेश्वर महादेवा धाम में स्थित पहाड़ी बाबा की कुटी भी उसी परंपरा की एक जीवंत मिसाल है।

करीब पचास वर्ष पूर्व की बात है। बाबा जी हरिद्वार स्नान के लिए लोगों के साथ निकले और फिर कभी लौटकर नहीं आए। किंतु उनका तपोस्थल आज भी उतना ही सजीव और चमत्कारी प्रतीत होता है। जिस चौतरे पर बाबा जी बैठा करते थे, उसकी आज भी पूजा होती है। दूर-दराज़ से आने वाले सैकड़ों श्रद्धालु वहां माथा टेकते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति पाते हैं।

आभरण तालाब के दक्षिण स्थित मिट्टी और खरफूस से बनी यह कुटी आज भी आस्था का केंद्र है। यहां बाबा जी द्वारा स्थापित भगवान शिव का अरघा है और साथ ही भुजा नंद सरस्वती नागा बाबा द्वारा निर्मित यज्ञशाला भी। मेलों और विशेष अवसरों पर यहां हवन-पूजन होता है और शिवभक्त बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि कोई नहीं जानता कि बाबा जी कितने वर्षों तक यहां रहे, लेकिन उनके चमत्कार आज भी लोगों की जुबान पर हैं। कुटी पर रहने वाले मुन्नू बाबा बताते हैं कि यह स्थान अत्यंत शक्तिशाली है। यहां रामचरितमानस का अखंड पाठ, शादी-विवाह और अन्य धार्मिक अनुष्ठान लगातार होते रहते हैं।

बाबा जी के चमत्कार
कहा जाता है कि प्रारंभ में बाबा जी रामनगर चौराहे पर भिखारी सिंह नामक व्यक्ति के होटल पर रहा करते थे। एक बार वहां काम कर रहे एक लड़के को सांप ने काट लिया। लोग घबराए हुए थे, तभी बाबा जी पहुंचे और बोले—“इसे इलाज के लिए अवश्य ले जाओ, लेकिन यदि यह बच नहीं पाया तो सांप भी यहां से नहीं जाएगा।” बाबा जी ने सांप के चारों ओर एक गोला खींच दिया। चमत्कार देखिए, तीन दिन बाद जब बच्चा स्वस्थ होकर लौटा, तभी बाबा जी ने सांप को मुक्त किया और चेतावनी दी कि भविष्य में निर्दोषों को न सताना। सांप सिर झुकाकर वहां से चला गया।

इसी प्रकार एक बार एक पुलिसकर्मी ने बाबा जी का मजाक उड़ाते हुए कहा कि “हमने ऐसे बहुत बाबा देखे हैं, जो भोली-भाली जनता को ठगते हैं।” बाबा जी ने शांत भाव से उत्तर दिया—“जैसी तुम्हारी सोच है, वैसा ही अनुभव होगा।” हुआ भी यही। जब वह अपनी गाड़ी के पास गया तो वह स्टार्ट ही नहीं हुई। लोगों ने उसे समझाया कि क्षमा मांगो। जैसे ही उसने बाबा जी से माफी मांगी, गाड़ी चल पड़ी।

जीवित आस्था
ऐसी अनेक घटनाओं के कारण पहाड़ी बाबा आज भी लोगों के श्रद्धा-भक्ति के केंद्र बने हुए हैं। महादेवा, रामनगर, सेमराय, रमवापुर, बुढवल, बनरकी समेत अनेक गांवों के लोग यहां नियमित रूप से पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। उनका विश्वास है कि बाबा जी आज भी अदृश्य रूप से यहां विराजमान हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

पहाड़ी बाबा का जीवन और उनके चमत्कार इस बात के प्रमाण हैं कि संत महात्माओं की साधना समय और शरीर की सीमा से परे होती है। उनकी शक्ति और कृपा आज भी आस्था के दीपक की तरह जल रही है और आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देती है कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास कभी व्यर्थ नहीं जाते।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button